Prabhat Vaibhav, Digital Desk : भारत और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश विरोधी गतिविधियों और घुसपैठ को पूरी तरह खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने 'स्मार्ट फेंसिंग' (Smart Fencing) प्रोजेक्ट में तेजी ला दी है। पंजाब के गुरदासपुर जिले के कलानौर सेक्टर में अत्याधुनिक तकनीक वाली 12 फीट ऊंची बाड़ लगाई जा रही है, जो आतंकियों और तस्करों के लिए अभेद्य दीवार साबित होगी।
स्मार्ट फेंसिंग की 3 बड़ी ताकतें
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सूत्रों के अनुसार, यह नई फेंसिंग पुरानी तारों के मुकाबले कई गुना अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से उन्नत है:
एंटी-कट और एंटी-रस्ट: इस बाड़ में इस्तेमाल की गई तारें एंटी-कट हैं, जिन्हें साधारण कटर से काटना नामुमकिन है। साथ ही, यह एंटी-रस्ट (जंग-रोधी) है, जिससे खराब मौसम और बारिश में भी इसकी मजबूती बनी रहेगी।
अभेद्य बनावट: बाड़ की ऊंचाई 12 फीट रखी गई है और इसकी जाली इतनी बारीक है कि इसमें से कोई भी मोटी वस्तु या उपकरण आर-पार नहीं किया जा सकता।
24 घंटे डिजिटल निगरानी: आने वाले समय में इस स्मार्ट फेंसिंग को PTZ कैमरों, सीसीटीवी और ग्राउंड सेंसिंग सिस्टम (जमीन के नीचे सेंसर) से जोड़ा जाएगा। इससे यदि कोई जमीन खोदकर या बाड़ के करीब आने की कोशिश करेगा, तो कंट्रोल रूम में तुरंत अलार्म बज जाएगा।
किसानों को मिली राहत, लेकिन मुआवजे की टीस बरकरार
बॉर्डर के गांवों (रोसे, चंदू वडाला) के किसानों ने बताया कि नई फेंसिंग अंतरराष्ट्रीय सीमा के और करीब (करीब 150 गज) खिसक गई है।
फायदा: किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन अब फेंसिंग के भीतर आ गई है, जिससे उन्हें अब फसल कटाई के लिए बार-बार गेट पास बनवाने और सुरक्षा घेरे से गुजरने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही जंगली जानवरों से भी सुरक्षा मिली है।
समस्या: गांव रोसे के सरपंच और बॉर्डर एरिया संघर्ष कमेटी के नेता प्रभशरण सिंह रोसे ने मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तार लगाने के लिए जमीन दो बार एक्वायर की गई, लेकिन किसानों को अब तक फूटी कौड़ी नहीं मिली है। किसानों का दावा है कि केंद्र ने पैसा जारी कर दिया है, लेकिन पंजाब सरकार की ओर से उन्हें भुगतान नहीं हुआ है, जिसके लिए मामला कोर्ट में भी लंबित है।
सुरक्षा का नया युग
यह स्मार्ट फेंसिंग न केवल घुसपैठ रोकेगी, बल्कि ड्रोन के जरिए होने वाली ड्रग्स और हथियारों की तस्करी पर भी लगाम लगाएगी। पंजाब की सीमा को 'सील' करने की इस योजना से बीएसएफ के जवानों को विषम परिस्थितियों में भी निगरानी करने में बड़ी मदद मिलेगी।




