img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब के अमृतसर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ मशहूर बॉडी बिल्डर वरिंदर सिंह की सर्जरी के दौरान हुई मौत के मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। लंबी जांच और विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर जिले के एक प्रतिष्ठित अस्पताल के चार डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। वरिंदर सिंह की मौत के बाद से ही उनके परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही (Medical Negligence) के गंभीर आरोप लगाए थे। अब एसआईटी की रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि ऑपरेशन के दौरान तय मानकों का पालन नहीं किया गया था, जिसके चलते एक उभरते हुए खिलाड़ी की जान चली गई।

एसआईटी जांच में सामने आई डॉक्टरों की लापरवाही

बॉडी बिल्डर वरिंदर सिंह की मौत का मामला पिछले कई महीनों से गर्माया हुआ था। परिजनों के भारी विरोध और इंसाफ की मांग को देखते हुए प्रशासन ने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक एसआईटी (Special Investigation Team) का गठन किया था। एसआईटी ने मेडिकल रिकॉर्ड्स, ऑपरेशन थिएटर के फुटेज और विशेषज्ञों की राय लेने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने जरूरी एहतियात नहीं बरती और इमरजेंसी की स्थिति को संभालने में विफल रहे। इसी आधार पर पुलिस ने संबंधित अस्पताल के चार मुख्य डॉक्टरों को नामजद करते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

परिजनों का आरोप: जानबूझकर की गई कोताही

वरिंदर सिंह के परिवार का कहना है कि वे वरिंदर को एक मामूली सर्जरी के लिए अस्पताल लाए थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वहां से उनका शव बाहर निकलेगा। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने न केवल लापरवाही की, बल्कि घटना के बाद सही जानकारी देने में भी आनाकानी की। बॉडी बिल्डिंग की दुनिया में नाम कमाने वाले वरिंदर के समर्थकों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। परिजनों का कहना है कि एफआईआर दर्ज होना इंसाफ की पहली सीढ़ी है, और वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक दोषी डॉक्टरों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती और उनका लाइसेंस रद्द नहीं कर दिया जाता।

अमृतसर पुलिस की सख्त कार्रवाई और आगामी कदम

अमृतसर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस अब अस्पताल के अन्य स्टाफ और उस समय मौजूद चश्मदीदों के बयान दर्ज करेगी। सूत्रों की मानें तो जांच के घेरे में अस्पताल का मैनेजमेंट भी आ सकता है। अमृतसर के सिविल सर्जन कार्यालय को भी इस मामले की जानकारी दे दी गई है ताकि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत प्रशासनिक कार्रवाई की जा सके। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल एथिक्स पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।