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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए भगवंत मान सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां मंगलवार को समाना में चल रहे 'धर्म युद्ध मोर्चा' में पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को बेअदबी के खिलाफ प्रस्तावित नए बिल की आधिकारिक कॉपी सौंपी।

स्पीकर संधवां ने इसे 'गुरु का कानून' बताते हुए कहा कि यह विधेयक पूरी दुनिया को मानवता और सभी धर्मों के सम्मान का संदेश देगा।

विधेयक की मुख्य बातें: 'जागत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026'

पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किए गए इस बिल का मुख्य उद्देश्य बेअदबी जैसी संवेदनशील घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना और आरोपियों को सख्त सजा दिलाना है।

मानसिक स्थिति की जांच: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में बताया कि अब तक 80-90% मामलों में आरोपियों को 'मानसिक रूप से बीमार' बताकर बचा लिया जाता था। नए कानून के तहत, ऐसे मामलों में आरोपी की मानसिक स्थिति की गहन वैज्ञानिक जांच अनिवार्य होगी ताकि कानून की खामियों का फायदा न उठाया जा सके।

कठोर सजा का प्रावधान: सरकार के अनुसार, मौजूदा कानूनों में सजा पर्याप्त नहीं थी। नए संशोधन के माध्यम से बेअदबी के मामलों में उम्रकैद जैसी कठोर सजा के रास्ते साफ किए जा रहे हैं।

सद्भाव की रक्षा: विधेयक का प्राथमिक लक्ष्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता सुनिश्चित करना और समाज में धार्मिक भावनाओं के कारण पैदा होने वाले तनाव को समाप्त करना है।

मोर्चा अभी जारी रहेगा: राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार

स्पीकर संधवां ने अपना वादा पूरा करते हुए बिल की कॉपी मोर्चा के संयोजकों को सौंप दी है, लेकिन प्रदर्शनकारी अभी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

कंडीशन: धर्म युद्ध मोर्चा के संयोजकों का कहना है कि जब तक इस विधेयक पर राज्यपाल (Governor) की अंतिम मुहर नहीं लग जाती, तब तक मोर्चा समाप्त नहीं होगा।

बाबा गुरजीत सिंह फौजी: टावर पर चढ़े बाबा गुरजीत सिंह फौजी ने साफ कर दिया है कि राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद ही वे नीचे उतरेंगे।

संशोधन क्यों था जरूरी?

पंजाब सरकार का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में बेअदबी की बार-बार होने वाली घटनाओं ने सामाजिक सद्भाव को बुरी तरह प्रभावित किया है। पुरानी धाराओं के तहत कानूनी प्रक्रिया धीमी और सजा कम होने के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद थे। इस नए 'गुरु के कानून' के माध्यम से सरकार एक कड़ा संदेश देना चाहती है कि धार्मिक ग्रंथों का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।