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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक अस्पताल को निशाना बनाकर किए गए हमले के बाद वैश्विक राजनीति में उबाल आ गया है। इस हमले के तार पाकिस्तान से जुड़ने और कथित सैन्य संलिप्तता के दावों के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने कड़ा रुख अपनाया है। यूरोपीय संघ ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पाकिस्तान की इस कार्रवाई की तीखी निंदा की है। ईयू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चिकित्सा संस्थानों और नागरिक ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और युद्ध संबंधी कानूनों का खुला उल्लंघन है। इस हमले ने न केवल काबुल में दहशत फैला दी है, बल्कि दक्षिण एशिया में सुरक्षा और संप्रभुता के सवाल को भी गंभीर बना दिया है।

यूरोपीय संघ का कड़ा रुख: पाकिस्तान को दी चेतावनी

यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी संप्रभु देश की सीमा के भीतर घुसकर अस्पतालों जैसे संवेदनशील स्थानों पर हमला करना असहनीय है। ईयू ने जोर देकर कहा कि काबुल के अस्पताल पर जो कार्रवाई हुई, वह न केवल मानवता के विरुद्ध है, बल्कि जिनेवा कन्वेंशन के सिद्धांतों को भी चुनौती देती है। यूरोपीय देशों ने पाकिस्तान से जवाबदेही की मांग की है और संयुक्त राष्ट्र (UN) से भी इस मामले में दखल देने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निंदा प्रस्ताव के बाद पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दबाव बढ़ सकता है।

काबुल में अस्पताल पर हमला: मानवता शर्मसार

काबुल के इस अस्पताल में हुए हमले के दौरान मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच भारी अफरा-तफरी मच गई थी। चश्मदीदों के अनुसार, हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि अस्पताल के एक बड़े हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा है। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। अफगानिस्तान में पहले से ही खराब स्वास्थ्य सेवाओं के बीच इस तरह की सैन्य कार्रवाई ने चिकित्सा तंत्र को पूरी तरह चरमरा दिया है। तालिबान प्रशासन ने भी इस हमले को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए पाकिस्तान के खिलाफ सख्त नाराजगी जाहिर की है।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और वैश्विक प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध या संघर्ष की स्थिति में भी अस्पतालों को 'सुरक्षित क्षेत्र' (Safe Zone) माना जाता है। पाकिस्तान की इस कथित सैन्य कार्रवाई ने उन सभी वैश्विक संधियों को दरकिनार कर दिया है जो नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी देती हैं। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने भी ईयू के इस बयान का समर्थन करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान इस वैश्विक दबाव और कड़े आरोपों का सामना किस तरह करता है, जबकि उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर एक बार फिर गहरा दाग लगा है।

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