Prabhat Vaibhav, Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां 'परमाणु शक्ति' और 'राष्ट्रीय स्वाभिमान' आमने-सामने हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि तेहरान अपना संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) अमेरिका या किसी अन्य को सौंपने पर सहमत हो गया है। ईरान के इस सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध के मैदान में भले ही चुनौतियों का सामना कर रहा हो, लेकिन अपनी परमाणु संप्रभुता के मुद्दे पर झुकने को तैयार नहीं है।
ट्रंप का दावा बनाम ईरान की हकीकत: परमाणु धूल का विवाद
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक सनसनीखेज पोस्ट की थी। ट्रंप ने संकेत दिया था कि अमेरिकी B-2 बमवर्षक हमलों के बाद ईरान अपना परमाणु भंडार सौंप सकता है। उन्होंने इसे "परमाणु धूल" से जोड़ते हुए दावा किया कि अमेरिका को वह यूरेनियम मिल जाएगा जो हमलों के दौरान दफन हो गया था।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने सरकारी टीवी पर आकर इन दावों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "ईरान का संवर्धित यूरेनियम कहीं भी हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। ट्रंप के साथ हमारी किसी भी वार्ता में यूरेनियम सौंपने का मुद्दा उठा ही नहीं है।"
20 अरब डॉलर का लालच या मुआवजे की मांग?
वाशिंगटन की ओर से यह प्रस्ताव सामने आया था कि यदि तेहरान अपना यूरेनियम भंडार छोड़ देता है, तो अमेरिका उसके जमे हुए (Frozen) 20 अरब डॉलर के फंड को जारी कर सकता है। हालांकि, ईरान की प्राथमिकताएं अब बदल चुकी हैं:
10 सूत्रीय योजना: ईरान अब प्रतिबंध हटाने की योजना पर अड़ा है।
मुआवजे की मांग: तेहरान का कहना है कि उसे थोपे गए युद्ध के कारण हुए भारी नुकसान का हर्जाना चाहिए।
परमाणु अधिकार: ईरान का तर्क है कि परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत उसे नागरिक परमाणु कार्यक्रम चलाने का पूर्ण अधिकार है।
ईरान के पास कितना है 'घातक' यूरेनियम?
युद्ध शुरू होने से पहले, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए थे। अनुमान के मुताबिक, ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60% तक संवर्धित यूरेनियम था। यह 2015 के परमाणु समझौते की तय सीमा (3.67%) से कहीं ज्यादा है।
जून 2025 में हुए अमेरिकी हमलों के बाद से स्थिति और रहस्यमयी हो गई है। तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को अपने परमाणु स्थलों का दौरा करने से रोक दिया है, जिससे दुनिया भर में यह डर बढ़ गया है कि ईरान परमाणु हथियारों के कितना करीब है।
क्या बातचीत से निकलेगा समाधान?
ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, "पुरानी बातचीत परमाणु मुद्दे पर थी, लेकिन अब हमारा पूरा ध्यान केवल युद्ध को समाप्त करने पर है।" ईरान यह संदेश देना चाहता है कि वह परमाणु कार्यक्रम को सौदेबाजी का हिस्सा नहीं बनाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप प्रशासन सैन्य दबाव बढ़ाएगा या कूटनीति के जरिए कोई नया रास्ता खोजेगा? फिलहाल, ईरान का आक्रामक रुख किसी भी बड़े समझौते की उम्मीदों पर पानी फेरता नजर आ रहा है।




