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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पंजाब की जेलों में भीड़ इस कदर बेकाबू हो चुकी है कि अब जेल प्रशासन ने हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। अमृतसर सेंट्रल जेल ने क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण नए बंदियों को लेने से साफ इनकार कर दिया है। यह स्थिति न केवल सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि जेलों के भीतर एक बड़े स्वास्थ्य संकट (Health Crisis) को भी जन्म दे रही है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।

आंकड़ों की जुबानी: क्षमता बनाम हकीकत

पंजाब की जेलों में भीड़ का आलम यह है कि बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है:

कुल क्षमता: लगभग 26,000 कैदी।

वर्तमान संख्या: लगभग 37,000 कैदी।

अतिरिक्त भार: क्षमता से 11,000 से अधिक कैदी बंद हैं।

कारण: नशे के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के कारण बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों ने जेलों में कैदियों की संख्या अचानक बढ़ा दी है।

स्वास्थ्य संकट: जेलों में फैला 'बीमारियों का जाल'

जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है, जिससे संक्रमण तेजी से फैल रहा है:

HIV और हेपेटाइटिस: 2023 की जांच में 951 कैदी HIV पॉजिटिव और 4,846 कैदी हेपेटाइटिस बी व सी से संक्रमित पाए गए थे।

नशे का असर: साझा सुइयों और सिरिंज के इस्तेमाल के कारण संक्रमण की दर राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है। लगभग 126 कैदी ऐसे हैं जो HIV और HCV दोनों से एक साथ संक्रमित हैं।

बढ़ते मामले: 2019-20 में जहां HIV के 4,131 मामले थे, वहीं 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 10,109 हो गई है।

हाई कोर्ट की सख्ती और सरकार का पक्ष

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने जेलों की बदहाली और चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर सरकार को घेरा है। कोर्ट ने निम्नलिखित बिंदुओं पर जवाब मांगा है:

जेलों में भीड़भाड़ कम करने की योजना।

मेडिकल स्टाफ और दवाओं की उपलब्धता।

कैदियों के मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया।

हिरासत में होने वाली अस्वाभाविक मौतें।

सरकार द्वारा दी गई जानकारी:

स्टाफ की कमी: मेडिकल ऑफिसर के 42 में से 36 पद भरे हैं (6 खाली), जबकि फार्मासिस्ट के 48 में से 13 पद रिक्त हैं।

अस्वाभाविक मौतें: 42 अप्राकृतिक मौतों के मामलों का निपटारा मानवाधिकार आयोग द्वारा किया जा चुका है।