Prabhat Vaibhav, Digital Desk : हिंदू धर्म में शनिवार और मंगलवार का दिन पवनपुत्र हनुमान जी की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। भक्त मंदिर जाकर बजरंगबली को चोला और सिंदूर चढ़ाते हैं, और अक्सर उनके चरणों का सिंदूर अपने माथे पर 'तिलक' के रूप में लगाते हैं। लेकिन क्या यह सिंदूर माथे पर लगाना धार्मिक दृष्टि से सही है? इसे लेकर भक्तों के मन में अक्सर दुविधा रहती है। आइए जानते हैं इस विषय पर क्या कहते हैं विद्वान और भगवान हनुमान को सिंदूर चढ़ाने के सही नियम क्या हैं।
क्या हनुमान जी का सिंदूर माथे पर लगाना चाहिए?
भगवान हनुमान का सिंदूर माथे पर लगाने के विषय में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि हनुमान जी का सिंदूर माथे पर लगाने की कोई अनिवार्य आवश्यकता नहीं है। यदि हनुमान जी को आपके कष्ट मिटाने होंगे, तो वे बिना सिंदूर लगाए भी आपकी पुकार सुन लेंगे।
माथे पर सिंदूर न लगाने के पीछे का तर्क
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार, इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
अतुलित तेज: हनुमान जी अतुलित बल के धाम और परम ब्रह्मचारी हैं। उनका तेज इतना प्रचंड है कि एक साधारण मनुष्य उसे संभालने में असमर्थ हो सकता है।
अपवित्रता का भय: मानव शरीर और मन अक्सर विकारों या बुरे विचारों से घिरा रहता है। हम चाहे कितने भी शुद्ध होने का दावा करें, दिनभर में मानसिक या शारीरिक अपवित्रता की संभावना बनी रहती है। ऐसे में भगवान का तेजपुंज सिंदूर माथे पर लगाकर दिनभर घूमना उचित नहीं माना जाता।
यदि सिंदूर लगाना हो, तो क्या है सही तरीका?
अगर कोई भक्त श्रद्धावश हनुमान जी का सिंदूर लगाना चाहता है, तो बागेश्वर बाबा ने उसके लिए एक विशेष विधि बताई है:
अल्प समय के लिए लगाएं: सिंदूर को माथे पर केवल कुछ क्षणों के लिए लगाएं।
शुद्धता का ध्यान: मन में बुरे विचार आने या अपवित्र होने से पहले ही इसे एक गीले साफ कपड़े से पोंछ लें।
विसर्जन: सिंदूर पोंछने के बाद उस कपड़े को धो लें और उस पानी को किसी पवित्र वृक्ष (जैसे पीपल या तुलसी) की जड़ में डाल दें। उसे कहीं भी इधर-उधर न फेंकें।
हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने के नियम
बजरंगबली को सिंदूर अर्पित करना उनकी प्रसन्नता प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग माना गया है। इसके नियम इस प्रकार हैं:
शुभ दिन: सिंदूर चढ़ाने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सर्वश्रेष्ठ होता है।
मिश्रण: हनुमान जी को कभी भी सूखा सिंदूर नहीं चढ़ाना चाहिए। सिंदूर में हमेशा चमेली का तेल मिलाकर ही उन्हें अर्पित करें।
मंत्र जाप: सिंदूर चढ़ाते समय 'ॐ हनुमते नमः' मंत्र का निरंतर पाठ करें।
पूर्ण पूजा: सिंदूर चढ़ाने के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें और फिर बूंदी या चने-गुड़ का भोग लगाएं।
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