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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अगर आप उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के निवासी हैं और रसोई गैस सिलिंडर के लिए घंटों लाइन में लगकर थक चुके हैं, तो आपके लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। जिले में गैस वितरण की चरमराती व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन ने 'नो लिस्ट, नो गैस' का नया फॉर्मूला लागू कर दिया है। अब गैस एजेंसियों और वितरण स्थलों पर मची अफरा-तफरी को रोकने के लिए उपभोक्ताओं की बाकायदा एक लिस्ट चस्पा की जाएगी। जिला पूर्ति कार्यालय ने साफ कर दिया है कि केवल उन्हीं लोगों को सिलिंडर दिया जाएगा, जिनका नाम उस दिन की आधिकारिक सूची में दर्ज होगा।

रोस्टर सिस्टम से होगा वितरण: एक दिन पहले ही पता चलेगा आपका नंबर

जिला पूर्ति अधिकारी करुणा पंत ने नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि अब प्रत्येक वितरण केंद्र के लिए एक विशेष रोस्टर और उपभोक्ताओं की क्रमवार सूची तैयार की गई है। इस नई प्रणाली के तहत, जिस क्षेत्र में गैस बांटी जानी है, वहां एक दिन पहले ही उन उपभोक्ताओं के नामों की सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी जिन्हें अगले दिन सिलिंडर मिलना है। इससे उपभोक्ताओं को बेवजह वितरण स्थल पर आकर भीड़ लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि कालाबाजारी और रसूखदारों के हस्तक्षेप पर भी लगाम लगेगी।

बुकिंग के 10 दिन बाद मिलेगी डिलीवरी; नहीं मिला गैस तो अगले दिन प्राथमिकता

प्रशासन ने नियमों को और सख्त करते हुए स्पष्ट किया है कि गैस की बुकिंग कराने के कम से कम 10 दिन बाद ही सिलिंडर उपलब्ध कराया जाएगा। यदि किसी तकनीकी कारण या स्टॉक खत्म होने की वजह से सूची में नाम होने के बावजूद उपभोक्ता को उस दिन गैस नहीं मिल पाती है, तो उसे अगले कार्यदिवस पर 'प्राथमिकता' (Priority) के आधार पर सबसे पहले सिलिंडर दिया जाएगा। इसके अलावा, जिन उपभोक्ताओं को डीएसी (Delivery Authentication Code) प्राप्त करने में समस्या आ रही है, उन्हें तत्काल अपनी गैस एजेंसी में जाकर मोबाइल नंबर और पता अपडेट कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अव्यवस्था फैलाने वालों पर 'कठोर' एक्शन; आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत होगी जेल

गैस वितरण के दौरान होने वाले हंगामे और वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए जिला पूर्ति अधिकारी ने कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति वितरण केंद्र पर शांति भंग करने या व्यवस्था में बाधा डालने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे इस नई व्यवस्था को सफल बनाने में सहयोग करें ताकि हर घर तक रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।