Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे, जिसके साथ ही प्रदेश के विकास और समृद्धि के नए कपाट खुल जाएंगे। यह एक्सप्रेसवे न केवल दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को पारंपरिक पर्यटन मॉडल से आगे ले जाकर एक आधुनिक आर्थिक हब के रूप में स्थापित करेगा।
मात्र ढाई घंटे में दिल्ली से देहरादून: वीकेंड टूरिज्म को लगेंगे पंख
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खूबी समय की बचत है। अब दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय 6 घंटे से घटकर मात्र ढाई घंटे रह जाएगा। समय की यह बचत 'वीकेंड टूरिज्म' (Weekend Tourism) में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार और चारधाम यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल आने की उम्मीद है, जिससे होटल, होमस्टे और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के राजस्व में सीधा इजाफा होगा।
औद्योगिक रफ्तार और निवेशकों का बढ़ता भरोसा
एक्सप्रेसवे के जरिए उत्तराखंड की कनेक्टिविटी उत्तर भारत के करीब 25 बड़े आर्थिक केंद्रों से सीधे हो जाएगी। हरिद्वार और देहरादून के औद्योगिक क्षेत्रों को दिल्ली-एनसीआर के बाजारों से जोड़ने वाली यह 'लाइफलाइन' मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फार्मा, एफएमसीजी (FMCG) और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे।
किसानों की बढ़ेगी आय: अब मंडियां नहीं होंगी दूर
उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के फल, सब्जियां और डेयरी उत्पाद अब कुछ ही घंटों में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की बड़ी मंडियों तक पहुंच सकेंगे। परिवहन में लगने वाले समय की कमी से किसानों की फसल खराब होने का जोखिम कम होगा और उन्हें उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। एक्सप्रेसवे के किनारे कोल्ड स्टोरेज और एग्री-लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होने से कृषि क्षेत्र में बड़ी क्रांति आने की संभावना है।
रोजगार के अवसर और पलायन पर लगेगी लगाम
पर्यटन, निर्माण, रियल एस्टेट और सेवा क्षेत्र में आने वाली तेजी से स्थानीय स्तर पर हजारों नए रोजगार पैदा होंगे। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण दिल्ली-एनसीआर के लोग अब देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में 'सेकेंड होम' और कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए उत्साहित हैं। रोजगार के ये बढ़ते अवसर पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने में भी मददगार साबित होंगे।
आस्था और सुविधाओं का संगम
चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी वरदान से कम नहीं है। हरिद्वार और ऋषिकेश तक पहुंच सुगम होने से यात्रा प्रबंधन बेहतर होगा और जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी। इसके अलावा, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक पहुंच भी तेज होगी, जिससे आम जनजीवन पहले से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित हो जाएगा।




