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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा को इस बार तकनीक के जरिए और भी सुरक्षित और सुगम बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। जिला प्रशासन और पुलिस ने यात्रा मार्ग पर एक ऐसा 'हाई-टेक सुरक्षा घेरा' तैयार किया है, जिससे न केवल भीड़ और ट्रैफिक पर नियंत्रण रहेगा, बल्कि आपदा की स्थिति में भी त्वरित मदद मिल सकेगी। इस बार 300 से अधिक मुस्तैद पुलिसकर्मी और आधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद से बाबा के भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

तीसरी आंख की निगरानी में पूरा ट्रैक, बिछड़े हुए लोग आसानी से मिलेंगे

रुद्रप्रयाग से केदारनाथ धाम तक के पूरे पैदल मार्ग और मुख्य पड़ावों पर 'तीसरी आंख' का पहरा रहेगा। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों, मुख्य बाजारों और हेलीपैड सहित पूरे रूट पर लगभग 200 हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। गौरीकुंड से धाम तक के पैदल ट्रैक पर विशेष रूप से 16 कैमरे स्थापित किए गए हैं। इन कैमरों का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यात्रा के दौरान अक्सर परिजनों से बिछड़ने वाले बच्चों और बुजुर्गों को ढूंढना अब बेहद आसान हो जाएगा।

नेटवर्क न होने पर भी काम करेगा SOS सिस्टम

यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस बार 14 विशेष एसओएस (SOS) प्वाइंट स्थापित किए गए हैं। इनमें से 5 मुख्य केंद्र गौरीकुंड, जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचोली और रुद्रा प्वाइंट पर स्थित हैं। इन केंद्रों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि अगर आपके मोबाइल में नेटवर्क नहीं है, तब भी आप सीधे जिला मुख्यालय स्थित आपदा कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकेंगे। यह सिस्टम संकट में फंसे यात्री की 'रियल टाइम लोकेशन' ट्रेस कर तत्काल बचाव दल भेजने में सक्षम होगा।

भीड़ प्रबंधन के लिए ड्रोन और 300 पुलिसकर्मियों की तैनाती

भीड़ और कानून व्यवस्था संभालने के लिए गौरीकुंड से लेकर सोनप्रयाग और केदारनाथ धाम तक 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा, प्रशासन 5 अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों से आसमान से भी निगरानी रखेगा। ट्रैफिक जाम और संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों की गतिविधियों पर 24 घंटे सक्रिय रहने वाले जिला आपदा कंट्रोल रूम से नजर रखी जाएगी, जहां पांच विशेषज्ञों की टीम हर हलचल पर पैनी नजर रखेगी।

घोड़ा-खच्चरों पर बारकोड और चिप से निगरानी

सुरक्षा व्यवस्था को केवल इंसानों तक सीमित नहीं रखा गया है। यात्रा मार्ग पर चलने वाले लगभग 5 हजार घोड़ा-खच्चरों पर भी बारकोड, टोकन और डिजिटल चिप लगाई जा रही है। इससे उनकी लोकेशन और गतिविधियों को ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे श्रद्धालुओं के साथ होने वाली किसी भी अप्रिय घटना या धोखाधड़ी पर लगाम कसी जा सकेगी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनएस रजवान के अनुसार, इन व्यवस्थाओं का मुख्य लक्ष्य श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और यादगार यात्रा अनुभव प्रदान करना है।