Prabhat Vaibhav,Digital Desk : 'स्वच्छ कोटद्वार-स्वस्थ कोटद्वार' का नारा बुलंद करने वाले नगर निगम के प्रयासों पर कुछ शहरवासी ही पलीता लगा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि महीने के मात्र 30 रुपये (यानी प्रतिदिन का केवल एक रुपया) बचाने के चक्कर में लोग घरों की गंदगी कचरा वाहनों में देने के बजाय चोरी-छिपे सड़कों पर फेंक रहे हैं। इस लापरवाही के कारण न केवल शहर की सूरत बिगड़ रही है, बल्कि बढ़ती गर्मी के साथ संक्रामक बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।
प्रतिदिन एक रुपये का मोह और शहर की रैंकिंग में गिरावट
नगर निगम कोटद्वार के 40 वार्डों में घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने के लिए नियमित वाहन चलाए जाते हैं। इसके लिए निगम प्रत्येक घर से प्रतिमाह 30 रुपये का मामूली शुल्क लेता है। लेकिन, जागरूकता के अभाव और चंद पैसों के लालच में लोग रात के अंधेरे में कूड़ा सड़क किनारे, सार्वजनिक स्थानों या खाली प्लॉटों में फेंक देते हैं। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये का सीधा असर शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर पड़ा है। साल 2022 में कोटद्वार राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वे में 270वें स्थान पर था, जो 2024 में गिरकर 305वें स्थान पर पहुंच गया है।
चेतावनी बोर्ड और कैमरों का भी खौफ नहीं
शहर की विडंबना देखिए कि जहां नगर निगम ने कूड़ा न फेंकने के चेतावनी बोर्ड लगाए हैं और सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए हैं, उन्हीं जगहों पर गंदगी के सबसे ऊंचे ढेर नजर आते हैं। पनियाली गदेरे को तो लोगों ने 'डंपिंग जोन' में तब्दील कर दिया है। देवी रोड और गोखले मार्ग जैसे व्यस्त इलाकों में दुकानदार और फल-सब्जी विक्रेता सरेआम गंदगी गदेरे या सड़कों पर उड़ेल रहे हैं। इतना ही नहीं, कूड़े के ढेर में आग लगाने से वायु प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।
मात्र 60% घरों से हो रहा कूड़ा कलेक्शन
आंकड़ों की मानें तो नगर निगम क्षेत्र में करीब 45 हजार भवन हैं और डेढ़ लाख की आबादी बसती है। निगम के अथक प्रयासों और जागरूकता अभियानों के बावजूद वर्तमान में केवल 60 प्रतिशत घरों से ही कूड़ा कलेक्शन हो पा रहा है। शेष 40 प्रतिशत आबादी या तो सड़कों को डस्टबिन बना रही है या प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषित कर रही है। महापौर शैलेंद्र सिंह रावत का कहना है कि निगम गंभीरता से कार्य कर रहा है, लेकिन बिना जनभागीदारी के शहर को सुंदर बनाना मुमकिन नहीं है।
प्रशासन की सख्ती और जनता की जिम्मेदारी
नगर निगम पूर्व में सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई कर चुका है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा। अब प्रशासन और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। अगर कोटद्वार को स्वच्छता के पायदान पर ऊपर ले जाना है, तो नागरिकों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी और मात्र एक रुपये के लालच को छोड़ शहर की सेहत को प्राथमिकता देनी होगी।




