Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर चल रहे विवाद और तकनीकी शिकायतों के बीच योगी सरकार ने उपभोक्ताओं के हक में कई बड़े फैसले लिए हैं। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने शक्ति भवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में घोषणा की कि अब नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद शुरुआती 45 दिनों तक उपभोक्ताओं की बिजली नहीं काटी जाएगी। साथ ही, तकनीकी समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने मीटरों को बदलने की प्रक्रिया पर भी तत्काल रोक लगा दी गई है।
प्रमुख फैसले: उपभोक्ताओं के लिए क्या बदला?
सरकार द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. 45 दिनों का 'सुरक्षा कवच'
अब जहां भी नए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां उपभोक्ताओं को कुल 45 दिनों की राहत मिलेगी।
15 दिन: कन्वर्जन अवधि (पुराने से नए सिस्टम में बदलाव)।
30 दिन: अतिरिक्त ग्रेस पीरियड।
इस अवधि के दौरान किसी भी स्थिति में कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।
2. जीरो बैलेंस पर 'इमरजेंसी' बिजली
छोटे उपभोक्ताओं (2 किलोवाट भार तक) के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किया है।
यदि मीटर का बैलेंस जीरो हो जाता है, तब भी अधिकतम तीन दिन या 200 रुपये तक की बिजली आपूर्ति जारी रहेगी। इससे उपभोक्ताओं को रिचार्ज करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।
3. पांच-स्तरीय एसएमएस (SMS) अलर्ट सिस्टम
उपभोक्ताओं को अंधेरे से बचाने के लिए अब 5 बार अलर्ट भेजा जाएगा:
पहला अलर्ट: जब बैलेंस 30% बचेगा।
दूसरा अलर्ट: जब बैलेंस 10% बचेगा।
तीसरा अलर्ट: बैलेंस पूरी तरह खत्म होने पर।
चौथा अलर्ट: कनेक्शन कटने से एक दिन पहले।
पांचवां अलर्ट: डिस्कनेक्शन होने के बाद।
4. अवकाश के दिन नहीं कटेगी बिजली
ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रविवार और अन्य सार्वजनिक अवकाश के दिनों में किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।
तकनीकी जांच और विशेषज्ञों की समिति
पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदलने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया गया है, जो 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
समिति के सदस्य:
प्रो. अंकुश शर्मा व प्रो. प्रबोध वाजपेयी: आईआईटी कानपुर।
तेजस मिस्त्री: अनुभाग प्रमुख, इलेक्ट्रिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन (ERDA), वड़ोदरा।
जीडी द्विवेदी: निदेशक (वितरण), पावर कारपोरेशन (संयोजक)।
भीषण गर्मी को लेकर सख्त निर्देश
ऊर्जा मंत्री ने बिजली विभाग के अधिकारियों को 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने को कहा है:
ट्रांसफार्मर: खराब या फुंके हुए ट्रांसफार्मर बदलने में कोई देरी न हो।
मरम्मत: ढीले तारों और स्पार्किंग की समस्या को तुरंत ठीक किया जाए।
संवाद: जिन उपभोक्ताओं के कनेक्शन कटे हैं, अधिकारी उनसे फोन पर बात कर उनकी समस्याओं का समाधान करें।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा आशीष गोयल और सभी डिस्काम के एमडी शामिल थे। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि उपभोक्ता की संतुष्टि ही सर्वोच्च प्राथमिकता है और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाएगी।
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