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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की राजनीति में करीब दो दशकों तक सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने सूबे में सत्ता परिवर्तन की नई पटकथा लिख दी है। 5 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मुख्यमंत्री के नामांकन पत्र भरने के साथ ही अब सबकी नजरें इस सवाल पर टिकी हैं कि बिहार का अगला 'कैप्टन' कौन होगा? पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही भाजपा के भीतर तीन दिग्गज चेहरों—सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय और दिलीप जायसवाल—के नामों पर मंथन तेज हो गया है। माना जा रहा है कि होली के बाद बिहार को अपना नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।

1. सम्राट चौधरी: 'पगड़ी' वाले नेता और ओबीसी कार्ड

वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। कुशवाहा समाज से आने वाले सम्राट ने नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने के लिए पगड़ी बांधने का जो संकल्प लिया था, वह काफी चर्चा में रहा।

ताकत: संगठन और सरकार में तालमेल बिठाने का अनुभव। कुशवाहा-कुर्मी (Luv-Kush) वोट बैंक पर मजबूत पकड़।

रणनीति: भाजपा उन्हें सीएम बनाकर यह संदेश देना चाहती है कि वह पिछड़ों की असली हितैषी है।

2. नित्यानंद राय: यादव वोट बैंक में 'सेंधमारी' का मास्टर प्लान

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम दिल्ली से लेकर पटना तक गूंज रहा है। अमित शाह के भरोसेमंद माने जाने वाले राय यादव समुदाय से आते हैं।

ताकत: राजद के मजबूत यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की क्षमता। अमित शाह और पीएम मोदी का सीधा वरदहस्त।

रणनीति: यदि भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लालू-तेजस्वी के आधार वोट बैंक को चुनौती देना चाहती है, तो नित्यानंद राय सबसे बड़ा दांव हो सकते हैं।

3. दिलीप जायसवाल: सौम्य स्वभाव और 'सीमांचल' का चेहरा

बिहार के उद्योग मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल भी इस रेस में एक 'डार्क हॉर्स' (छुपारुस्तम) बनकर उभरे हैं।

ताकत: अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व। अमित शाह की पसंद; शाह अक्सर सीमांचल दौरे पर उनके ही मेडिकल कॉलेज में रुकते हैं।

रणनीति: जायसवाल को आगे कर भाजपा सीमांचल और कोसी क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत कर सकती है, जहाँ पार्टी फिलहाल कमजोर मानी जाती है।

'पावर ट्रांसफर' का नया फॉर्मूला: 2 डिप्टी सीएम और नीतीश का मार्गदर्शन

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और जदयू के बीच सत्ता के नए समीकरण तय हो चुके हैं। नए सेटअप में मुख्यमंत्री भाजपा का होगा, जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री के पद मिल सकते हैं। चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, जो हाल ही में राजनीति में सक्रिय हुए हैं, उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। नीतीश कुमार भले ही दिल्ली जा रहे हैं, लेकिन वे एनडीए (NDA) के 'मार्गदर्शक' की भूमिका में बने रहेंगे।

क्या होगा 'सरप्राइज' कार्ड?

भाजपा नेतृत्व अक्सर अपने फैसलों से सबको चौंकाता रहा है (जैसे मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुआ)। ऐसे में अटकलें यह भी हैं कि क्या पार्टी संजीव चौरसिया या किसी महिला चेहरे को आगे कर 'मास्टरस्ट्रोक' खेल सकती है? फिलहाल, 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग के बाद नीतीश कुमार के इस्तीफे और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तारीखों का आधिकारिक ऐलान होने की उम्मीद है।