Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व चल रहा है और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ मां शक्ति की उपासना में लीन हैं। नौ दिनों के कठिन व्रत और नियमों का पालन करना हर भक्त का संकल्प होता है, लेकिन कई बार अनजाने में, भूलवश या शारीरिक अस्वस्थता के कारण व्रत खंडित हो जाता है। ऐसी स्थिति में भक्त अक्सर मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं और उन्हें पाप या दोष लगने का भय सताने लगता है। ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में इस समस्या का बेहद सरल और प्रभावी समाधान बताया गया है। अगर आपसे भी नवरात्रि के दौरान व्रत की मर्यादा में कोई चूक हो गई है, तो घबराने के बजाय इन विशेष उपायों को अपनाकर आप अपनी पूजा को पुनः सफल बना सकते हैं।
व्रत खंडित होने पर सबसे पहले करें यह पश्चाताप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर गलती से कुछ खा लेने या पी लेने से व्रत टूट जाए, तो सबसे पहले मन को शांत रखें और माता रानी से अपनी भूल के लिए सच्चे हृदय से क्षमा याचना करें। शास्त्रों में कहा गया है कि ईश्वर भाव के भूखे होते हैं, न कि केवल भोजन के त्याग के। व्रत टूटने का आभास होते ही शुद्ध जल से आचमन करें और हाथ-मुंह धोकर स्वच्छ हो जाएं। इसके बाद अपने इष्ट देव या मां दुर्गा के सम्मुख बैठकर 'ॐ श्री दुर्गाय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मानसिक पश्चाताप आपके व्रत में आई बाधा के दोष को कम करने में सहायक होता है।
दोष निवारण के लिए दान और हवन का महत्व
यदि व्रत गंभीर रूप से खंडित हुआ है, तो ज्योतिषविदों के अनुसार दान-पुण्य करना सबसे उत्तम उपाय है। आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी ब्राह्मण को अनाज, फल या वस्त्र दान कर सकते हैं। इसके अलावा, घर के मंदिर में कपूर जलाकर छोटी सी आरती करें और मां को सफेद बर्फी या मिश्री का भोग लगाएं। यदि संभव हो, तो शाम के समय हवन कुंड में आम की लकड़ियों से छोटी सी आहुति दें और दुर्गा सप्तशती के क्षमा प्रार्थना स्तोत्र का पाठ करें। यह प्रक्रिया आपके संकल्प को पुनर्जीवित करती है और नकारात्मकता को दूर करती है।
क्या दोबारा रखा जा सकता है व्रत? जानें शास्त्रों का मत
कई भक्तों के मन में यह सवाल होता है कि क्या एक बार व्रत टूटने के बाद अगले दिन का व्रत रखा जा सकता है? धर्मशास्त्रों के मुताबिक, यदि भूलवश ऐसा हुआ है तो आप अगले दिन से पुनः पूर्ण निष्ठा के साथ व्रत का पालन शुरू कर सकते हैं। बस ध्यान रहे कि इस बार नियम और संयम का पालन दोगुने उत्साह के साथ करें। संकल्प शक्ति को मजबूत करने के लिए गायत्री मंत्र का जाप भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। मां आदिशक्ति अत्यंत दयालु हैं और वे अपने भक्तों की अनजानी भूलों को क्षमा कर उनकी सच्ची भक्ति को स्वीकार करती हैं।
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