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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान एक बार फिर गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहा है। देश की मुद्रा, रियाल, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिससे राजधानी तेहरान और कई प्रमुख शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इस आंदोलन को पिछले तीन वर्षों में ईरान में सबसे बड़ा जन आक्रोश माना जा रहा है।

सरकारी टीवी के अनुसार, ईरान के केंद्रीय बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फारसी ने बढ़ते दबाव के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रियाल का मूल्य गिरकर लगभग 14 लाख डॉलर प्रति डॉलर हो गया है, जिससे बाजारों में अफरा-तफरी मच गई है। व्यापारी और दुकानदार राजधानी के मुख्य बाजार, सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाजार के आसपास विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कई लोगों ने अपनी दुकानें बंद कर दी हैं और दूसरों से भी ऐसा ही करने का आग्रह किया है।

सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि तेहरान और इस्फ़हान, शिराज और मशहद जैसे अन्य प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।

ये विरोध प्रदर्शन 2022 में पुलिस हिरासत में महसा ज़ीना अमिनी की मौत के बाद शुरू हुए हफ्तों तक चले आंदोलन के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं। आंदोलन के मुख्य कारण बढ़ती महंगाई और मुद्रा का गिरता मूल्य हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में महंगाई 42 प्रतिशत से अधिक हो गई, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

ईरान का आर्थिक संकट अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से भी जुड़ा हुआ है। 2015 के परमाणु समझौते के दौरान रियाल मजबूत था, लेकिन 2018 में अमेरिका के समझौते से हटने के बाद से आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हालिया क्षेत्रीय तनाव और नए प्रतिबंधों ने संकट को और भी गंभीर बना दिया है।