Prabhat Vaibhav, Digital Desk : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और डेस्क जॉब के बढ़ते कल्चर ने एक नई शारीरिक समस्या को जन्म दिया है—गर्दन का दर्द। जिसे डॉक्टरी भाषा में 'सर्वाइकल पेन' (Cervical Pain) कहा जाता है। पहले यह समस्या केवल उम्रदराज लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब गलत लाइफस्टाइल के कारण युवा भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं। अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचान कर इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकता है।
सर्वाइकल पेन के प्रमुख लक्षण: शरीर देता है ये चेतावनी
जब गर्दन की मांसपेशियों या हड्डियों पर दबाव बढ़ता है, तो शरीर में कई तरह के बदलाव महसूस होने लगते हैं। इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
गर्दन में अकड़न: गर्दन को दाएं-बाएं या ऊपर-नीचे घुमाने में तेज दर्द होना।
हाथों में कमजोरी: कई बार गर्दन की नस दबने के कारण हाथों और उंगलियों में कमजोरी महसूस होने लगती है, जिससे सामान पकड़ने में कठिनाई होती है।
मांसपेशियों में ऐंठन: गर्दन के आसपास की मांसपेशियों का अचानक सख्त हो जाना और वहां भारीपन महसूस होना।
सिरदर्द और चक्कर: सर्वाइकल का दर्द अक्सर सिर के पिछले हिस्से तक पहुंच जाता है, जिससे कभी-कभी चक्कर आने जैसी स्थिति भी बन जाती है।
क्यों बढ़ रहा है युवाओं में यह दर्द?
युवाओं में गर्दन दर्द का सबसे बड़ा कारण 'सिटिंग पोस्चर' (Sitting Posture) यानी बैठने का गलत तरीका है। घंटों तक लैपटॉप या मोबाइल की स्क्रीन पर झुककर काम करने से गर्दन की हड्डियों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। व्यायाम की कमी और एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठे रहने से मांसपेशियां अपनी लचीलापन खो देती हैं, जिससे दर्द स्थायी हो जाता है।
इलाज और बचाव: क्या करें और क्या न करें?
अगर आपको गर्दन में हल्का दर्द महसूस हो रहा है, तो तुरंत ये बदलाव करें:
पोस्चर में सुधार: यदि बैठने की स्थिति दर्द का कारण बन रही है, तो बिना देरी किए अपनी कुर्सी और कंप्यूटर की ऊंचाई को व्यवस्थित करें। सीधे होकर बैठें।
नियमित व्यायाम: गर्दन और कंधों के हल्के स्ट्रेचिंग व्यायाम नियमित रूप से करें। व्यायाम की कमी ही अक्सर दर्द का मूल कारण होती है।
कारण का पता लगाएं: दर्द का इलाज शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह मांसपेशियों की खिंचावट है या हड्डियों से जुड़ी कोई समस्या।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गर्दन का दर्द एक सप्ताह से ज्यादा बना रहे, हाथों में झुनझुनी महसूस हो या दर्द तीव्र होकर असहनीय हो जाए, तो घरेलू उपचार के बजाय तुरंत किसी फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। समय पर डॉक्टरी परामर्श और सही व्यायाम ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
_1062907431_100x75.jpg)



