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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने वाली है। 1 अप्रैल, 2026 से देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और एक्सप्रेसवे पर सफर करना अब और भी महंगा हो जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने टोल टैक्स की दरों में संशोधन करने का फैसला किया है, जिससे करोड़ों वाहन चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। अब आपको अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी होगी।

5 से 20 रुपये तक की होगी बढ़ोतरी

ताजा जानकारी के अनुसार, टोल शुल्क में 5 रुपये से लेकर 20 रुपये तक की वृद्धि की जा रही है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो टोल दरों में औसतन 3 से 5 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। यह नई दरें न केवल गुजरात के प्रमुख मार्गों पर, बल्कि दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-मेरठ और बेंगलुरु-मैसूर जैसे व्यस्ततम एक्सप्रेसवे पर भी लागू होंगी। उदाहरण के तौर पर, वडोदरा-अहमदाबाद एक्सप्रेसवे पर अब कार और जीप चालकों को 140 की जगह 145 रुपये का भुगतान करना होगा।

इन प्रमुख रूट्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

टोल टैक्स की मार देश के कई बड़े और महत्वपूर्ण कॉरिडोर पर पड़ने वाली है:

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे: यहाँ यात्रा करना 5 प्रतिशत तक महंगा हो सकता है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे: इस रूट के सबसे व्यस्त 'भरथाना टोल प्लाजा' पर भी दरों में बदलाव किया गया है।

दक्षिण भारत: बेंगलुरु एयरपोर्ट रोड, तमिलनाडु ईस्ट कोस्ट रोड और मदुरै रिंग रोड पर भी सफर की लागत बढ़ जाएगी।

बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे: यहाँ भी यात्रियों को बढ़ी हुई दरों के साथ भुगतान करना होगा।

कैश का झंझट खत्म, अब केवल डिजिटल भुगतान

बढ़ी हुई दरों के साथ-साथ टोल प्लाजा पर नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब टोल प्लाजा पर नकद भुगतान (Cash Payment) को पूरी तरह से हतोत्साहित किया जा रहा है। 1 अप्रैल से टोल का भुगतान केवल Fastag या UPI के माध्यम से ही किया जा सकेगा। इसका मुख्य उद्देश्य टोल नाकों पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करना और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। बिना फास्टैग वाले वाहनों को पहले की तरह दोगुना जुर्माना भरना पड़ सकता है।

आम आदमी की थाली पर भी पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि टोल टैक्स बढ़ने से केवल निजी वाहन चालक ही प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि माल ढुलाई (Logistics) भी महंगी हो जाएगी। जब ट्रकों का टोल खर्च बढ़ेगा, तो फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आने की संभावना है। नए वित्तीय वर्ष में एनएचएआई का यह कदम बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए जरूरी बताया जा रहा है, लेकिन मध्यम वर्ग के लिए यह एक बड़ा झटका है।