Prabhat Vaibhav, Digital Desk : देवभूमि में चारधाम यात्रा का शंखनाद तो हो चुका है, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार के व्यापारियों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। इस साल हरिद्वार का होटल और ट्रैवल कारोबार दोहरी चुनौतियों से जूझ रहा है। एक तरफ ईरान-अमेरिका (खाड़ी) युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतों में उछाल की आशंका ने यात्रियों के पैर रोक दिए हैं, तो दूसरी तरफ दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे ने हरिद्वार के "गेटवे" वाले रुतबे को ही चुनौती दे दी है।
1. खाड़ी युद्ध और महंगाई का खौफ: 60% तक गिरा ट्रैवल कारोबार
ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर सात समंदर पार हरिद्वार की टैक्सियों और बसों पर दिख रहा है।
अफ़वाहों का बाज़ार: सोशल मीडिया पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेतहाशा बढ़ने की अफ़वाहों ने श्रद्धालुओं को असमंजस में डाल दिया है। लोग इस डर से यात्रा टाल रहे हैं कि कहीं बीच रास्ते में किराया न बढ़ जाए या बजट न बिगड़ जाए।
ट्रैवल कारोबार धड़ाम: हरिद्वार ट्रैवल एसोसिएशन के अनुसार, पिछले साल शुरुआती दिनों में जहाँ रोजाना 600-700 वाहन रवाना होते थे, इस साल यह संख्या गिरकर 250-300 रह गई है।
पार्किंग में खड़े वाहन: हरिद्वार के करीब 225 पंजीकृत ट्रैवल कारोबारियों के पास एडवांस बुकिंग न के बराबर है। लगभग 2500 टैक्सी और टेंपो ट्रैवलर वर्तमान में बुकिंग के अभाव में पार्किंग में धूल फांक रहे हैं।
2. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: हरिद्वार को मिला 'बायपास'
नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यात्रा की रफ्तार तो बढ़ी है, लेकिन हरिद्वार के होटल कारोबार की कमर टूट गई है।
सीधे देहरादून का रुख: पहले श्रद्धालु मजबूरी में हरिद्वार रुकते थे, लेकिन अब एक्सप्रेसवे की सुविधा के कारण यात्री हरिद्वार के जाम और भीड़भाड़ से बचते हुए सीधे देहरादून निकल रहे हैं।
होटल हुए खाली: शहर के करीब 1200 होटलों में से 480 (लगभग 40%) होटल खाली पड़े हैं। होटल एसोसिएशन के अनुसार, इन्क्वारी और एडवांस बुकिंग में भारी कमी आई है, जिससे स्टाफ का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
आंकड़ों में समझिए कारोबार की स्थिति
| स्थिति | पिछले साल (शुरुआती दिन) | इस साल (2026) |
|---|---|---|
| वाहन संचालन (प्रतिदिन) | 600 - 700 | 250 - 300 |
| होटल ऑक्यूपेंसी | 90% - 100% | 60% (40% खाली) |
| ट्रैवल कारोबार में गिरावट | - | 60% की कमी |
| पंजीकरण काउंटर | भारी भीड़ | कम भीड़ (ऋषिकुल मैदान) |
व्यापारियों की चिंता: 'स्टाफ का खर्च भी नहीं निकल रहा'
हरिद्वार ट्रैवल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यात्री अब 15 मई के बाद की इंक्वायरी कर रहे हैं। अप्रैल के महीने में जो 'पीक सीजन' की उम्मीद थी, वह पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। होटल कारोबारियों का मानना है कि एक्सप्रेसवे ने हरिद्वार को एक 'स्टॉप-ओवर' सिटी के बजाय केवल एक 'बायपास' बनाकर छोड़ दिया है।
निष्कर्ष: क्या सुधरेगा मौसम?
हालांकि, मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार दिल्ली-एनसीआर और पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और ओलावृष्टि से तापमान गिरा है, जिससे गर्मी से राहत मिली है। लेकिन कारोबार की गर्मी तभी लौटेगी जब खाड़ी युद्ध का तनाव कम होगा और चारधाम यात्रा के लिए ऑफलाइन पंजीकरण में तेजी आएगी।
विशेषज्ञ सलाह: यदि आप भी चारधाम यात्रा का मन बना रहे हैं, तो अफ़वाहों पर ध्यान न दें। वर्तमान में उत्तराखंड प्रशासन ने यात्रा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य बनी हुई है।




