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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत और फ्रांस की दोस्ती में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों के साथ तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सपनों की नगरी मुंबई पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर भारत आए मैक्रों की यह चौथी भारत यात्रा है, लेकिन खास बात यह है कि राष्ट्रपति के तौर पर वे पहली बार मुंबई पहुंचे हैं।

लोक भवन में द्विपक्षीय वार्ता: रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई धार

आज दोपहर 3:15 बजे मुंबई के लोक भवन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच एक हाई-प्रोफाइल द्विपक्षीय बैठक होगी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करना और इसे रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर उभरती हुई तकनीकों तक ले जाना है। दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के ज्वलंत मुद्दों पर भी विस्तार से मंथन करेंगे।

नवाचार वर्ष 2026 का आगाज: स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए बड़ा मौका

द्विपक्षीय वार्ता के बाद, शाम करीब 5:15 बजे दोनों दिग्गज नेता 'भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026' का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के दिग्गज व्यापारिक नेता, स्टार्टअप संस्थापक और शोधकर्ता शामिल होंगे।

"भारत और फ्रांस अब केवल व्यापारिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का मिलकर सामना करने वाले साथी हैं। 'होराइजन 2047' रोडमैप इसी गहरी दोस्ती का प्रमाण है।" - विशेषज्ञों की राय

इंडो-पैसिफिक और एआई समिट पर रहेगी नजर

राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में भी शिरकत करेंगे। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर दोनों देशों के बीच होराइजन 2047 रोडमैप के तहत गहन चर्चा होने की उम्मीद है। मैक्रों की यह यात्रा रक्षा सौदों और तकनीकी सहयोग के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दिल्ली में एआई का महाकुंभ: 13 देशों के दिग्गज जुटे

प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में जिस एआई शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया है, उसमें फ्रांस समेत दुनिया के 13 प्रमुख देश हिस्सा ले रहे हैं। रूस, जापान, यूके, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के प्रतिनिधि एआई पारिस्थितिकी तंत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए जुटे हैं। मैक्रों की उपस्थिति इस समिट के वैश्विक महत्व को और अधिक बढ़ा देगी।