Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक रविवार को पटना में होने जा रही है, जिसमें देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ संगठन की आगे की रणनीति पर मंथन किया जाएगा। इस बैठक की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जा रही है कि पार्टी को नया कार्यकारी अध्यक्ष मिल सकता है।
करीब ढाई सौ प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह बैठक पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की अध्यक्षता में आयोजित होगी। लंबे समय से अस्वस्थता के कारण लालू यादव संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं, ऐसे में पार्टी के भीतर एक ऐसे चेहरे की जरूरत महसूस की जा रही है, जो संगठन की कमान संभाल सके।
परिवार में ही रहेगा कार्यकारी अध्यक्ष का पद
सूत्रों के मुताबिक, कार्यकारी अध्यक्ष का पद पार्टी परिवार से बाहर जाने की संभावना लगभग नहीं के बराबर है। बताया जा रहा है कि लालू यादव की पहली पसंद राबड़ी देवी थीं, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है। इसके बाद अब तेजस्वी यादव और मीसा भारती के नाम पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि इस दौड़ में तेजस्वी यादव फिलहाल आगे चल रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला लालू यादव को ही लेना है, जिन्होंने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
होटल मौर्या में होगी अहम बैठक
राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने जानकारी दी है कि बैठक पटना के होटल मौर्या में आयोजित होगी। इसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ-साथ सभी प्रदेश इकाइयों के अध्यक्ष, सांसद और विधायक भी शामिल होंगे। शनिवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में बैठक की तैयारियों की समीक्षा की गई।
बैठक के लिए गठित की गईं समितियां
प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने बताया कि बैठक को सफल बनाने के लिए अलग-अलग समितियों का गठन कर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शनिवार शाम तक 20 से अधिक प्रदेशों के अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पटना पहुंच चुके थे।
चुनावी हार के बाद नई रणनीति पर मंथन
बिहार विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद राजद के भीतर निराशा का माहौल है। ऐसे में इस बैठक को पार्टी के लिए संजीवनी माना जा रहा है। बैठक के जरिए न सिर्फ संगठन को फिर से सक्रिय करने, बल्कि मौजूदा राजनीतिक हालात के अनुसार नई रणनीति तय करने पर भी चर्चा हो सकती है।
चूंकि राजद का मुख्य जनाधार बिहार में ही है, इसलिए आगामी आंदोलन, कार्यक्रम और रणनीतियों का केंद्र बिंदु भी बिहार ही रहेगा। संगठन में अधिक सक्रिय नेताओं को अहम जिम्मेदारी देने पर भी विचार-विमर्श संभव है।
कुल मिलाकर, 25 तारीख को होने वाली यह बैठक राजद के भविष्य की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है, जहां सबकी नजरें लालू यादव के फैसले पर टिकी रहेंगी।




