Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को हरदोई में आयोजित एक भव्य समारोह में 594 किलोमीटर लंबे 'गंगा एक्सप्रेसवे' का लोकार्पण कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस ऐतिहासिक पल की गवाह संगम नगरी प्रयागराज भी बनी, जहां सोरांव के जूड़ापुर दांदू गांव में कार्यक्रम का सजीव प्रसारण (Live Telecast) किया गया। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से न केवल व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश की दूरियां भी सिमट जाएंगी।
प्रयागराज बना साक्षी: जूड़ापुर दांदू में उमड़ी जनभावना
गंगा एक्सप्रेसवे का अंतिम छोर प्रयागराज के सोरांव तहसील अंतर्गत जूड़ापुर दांदू गांव में स्थित है। यहीं से इस महापरियोजना का प्रवेश और निकास द्वार बनाया गया है। लोकार्पण के अवसर पर यहां आयोजित स्थानीय कार्यक्रम में सांसद प्रवीण पटेल, विधायक गुरु प्रसाद मौर्य और दीपक पटेल सहित कई जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और सीडीओ हर्षिका सिंह ने बताया कि यह एक्सप्रेसवे यूपी के विकास की नई लाइफलाइन साबित होगा।
कनेक्टिविटी का महाजाल: जौनपुर, भदोही और प्रतापगढ़ को भी सीधा लाभ
गंगा एक्सप्रेसवे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह केवल प्रयागराज ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों को सीधे दिल्ली और मेरठ से जोड़ देगा।
कोखराज-हंडिया बाईपास: जौनपुर, भदोही और प्रतापगढ़ की ओर से आने वाले वाहन इस बाईपास के माध्यम से सीधे एक्सप्रेसवे पर प्रवेश कर सकेंगे।
दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे: इस हाईवे से आने वाले वाहन भी बिना किसी बाधा के एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकेंगे, जिससे अंतरराज्यीय परिवहन बेहद सुगम हो जाएगा।
रैंप टोल प्लाजा: मेरठ और प्रयागराज में दो मुख्य टोल प्लाजा के अलावा, अलग-अलग शहरों के लिए रैंप टोल प्लाजा भी बनाए गए हैं ताकि स्थानीय कनेक्टिविटी बनी रहे।
समय की बड़ी बचत: 14 घंटे का सफर अब सिर्फ 7 घंटे में
इस सड़क परियोजना की सबसे बड़ी खूबी समय का प्रबंधन है। पहले प्रयागराज से मेरठ की दूरी तय करने में लगभग 13 से 14 घंटे का समय लगता था। गंगा एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद यह दूरी महज 6 से 7 घंटे में सिमट जाएगी। इससे न केवल आम यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि मालवाहक वाहनों की आवाजाही तेज होने से लॉजिस्टिक्स लागत में भी भारी कमी आएगी।
12 जिलों की चमकेगी किस्मत
मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और अंत में प्रयागराज तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों की आर्थिक स्थिति बदलने की क्षमता रखता है। एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) विकसित किए जाने की योजना है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। फिलहाल टोल टैक्स को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।




