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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पौड़ी गढ़वाल स्थित जनता इंटर कॉलेज की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के विभिन्न विभागों में लंबे समय से स्वीकृत पदों पर भर्ती न होने पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इसे हैरान करने वाली स्थिति बताते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि सभी विभागों के सचिवों से स्वीकृत और खाली पदों का पूरा विवरण जुटाकर शपथपत्र के साथ अदालत में पेश किया जाए।

हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी जवाब मांगा है कि जब विभागों में स्थायी, नियमित और स्वीकृत पद खाली हैं, तो नियमित भर्ती प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जा रही। साथ ही सवाल उठाया गया कि इन पदों को आउटसोर्सिंग, दैनिक वेतनभोगी या तदर्थ व्यवस्था के जरिए क्यों भरा जा रहा है।

अदालत ने चतुर्थ श्रेणी के पदों को विलुप्त कैडर घोषित किए जाने को लेकर भी सरकार से स्पष्ट जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को तय की गई है।

यह अहम आदेश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने 9 जनवरी को पारित किया, जिसे अब हाईकोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया गया है।

युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा असर

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में स्वीकृत स्थायी पद खाली होने के बावजूद अधिकारी नियमित नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के बजाय ठेके, आउटसोर्सिंग और अस्थायी माध्यमों से नियुक्तियां कर रहे हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था मनमानी, शोषणकारी और संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन है।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि बड़ी संख्या में योग्य और काबिल युवा नियमित नियुक्ति की प्रतीक्षा में हैं, लेकिन रिक्त पद होते हुए भी भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही, जो प्रशासनिक निष्क्रियता को दर्शाता है।

अस्थायी व्यवस्था से बढ़ रही चिंता

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब विभागों में बड़ी संख्या में पक्के और स्वीकृत पद खाली हैं, तब भी नियमित चयन प्रक्रिया शुरू न करना गंभीर विषय है। इसके बजाय आउटसोर्स, दैनिक, अंशकालिक और तदर्थ आधार पर भर्तियां की जा रही हैं।

अदालत ने यह भी चिंता जताई कि ऐसी अस्थायी नियुक्तियों में कार्यरत कर्मचारी समय के साथ आयु सीमा पार कर जाते हैं, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक जाता है। कोर्ट ने इस पूरी स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।