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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अगर आप भी बाहर खाना खाने के शौकीन हैं, तो अब अपने बिल को जरा गौर से देखिएगा। अक्सर लोग खाना खाने के बाद कुल राशि देखते हैं और भुगतान कर देते हैं, लेकिन आपकी यही लापरवाही जेब पर भारी पड़ सकती है। दरअसल, देशभर के होटल और रेस्टोरेंट द्वारा खाने के बिल में गुपचुप तरीके से 'एलपीजी शुल्क' या 'गैस सरचार्ज' जोड़ने की शिकायतें बढ़ रही हैं। इस मामले में अब केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

CCPA की सख्त चेतावनी: बिल में नहीं लगेगा कोई 'हिडन चार्ज'

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि कोई भी होटल या रेस्टोरेंट खाने के बिल में एलपीजी अधिभार जैसे अतिरिक्त शुल्क स्वतः (Automatically) नहीं जोड़ सकता। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, रेस्टोरेंट को यह सुनिश्चित करना होगा कि मेनू कार्ड में दिखाई गई कीमत में ही भोजन की पूरी लागत शामिल हो। ग्राहकों से केवल सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स (GST) ही अलग से लिया जा सकता है। ईंधन शुल्क या गैस के नाम पर वसूली करना अब नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।

पारदर्शिता के नाम पर उपभोक्ताओं के साथ बड़ा खेल

जांच में सामने आया है कि कई रेस्टोरेंट मेनू की कीमतों को कम दिखाने के चक्कर में अंत में 'फ्यूल सरचार्ज' जैसे नाम से अतिरिक्त राशि जोड़ देते हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत इसे 'अनुचित व्यापार व्यवहार' (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में रखा गया है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को मिली शिकायतों के बाद सीसीपीए ने साफ कर दिया है कि परिचालन लागत यानी गैस और बिजली का खर्च रेस्टोरेंट को अपनी डिश की कीमत में ही मैनेज करना होगा, इसे बिल में अलग से थोपना गैरकानूनी है।

गलत बिल थमाए तो तुरंत उठाएं ये कदम

अगर किसी रेस्टोरेंट में आपके बिल में एलपीजी शुल्क जुड़ा मिले, तो घबराएं नहीं बल्कि इन स्टेप्स को फॉलो करें:

मौके पर विरोध करें: सबसे पहले रेस्टोरेंट मैनेजर से बात करें और उस अवैध शुल्क को हटाने को कहें।

हेल्पलाइन नंबर 1915: अगर मैनेजर बात न माने, तो तुरंत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

ई-जागृति पोर्टल: आप घर बैठे 'ई-जागृति पोर्टल' के जरिए ऑनलाइन शिकायत भी कर सकते हैं।

कीमत तय करने की आजादी, लेकिन नियम की शर्त के साथ

सरकार ने साफ किया है कि रेस्टोरेंट अपनी डिश की कीमतें तय करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें जो भी वसूली करनी है, वह मेनू में प्रिंटेड रेट के जरिए ही होनी चाहिए। बिल के अंत में कोई भी नया 'सरप्राइज चार्ज' जोड़ना अब रेस्टोरेंट मालिकों को भारी पड़ सकता है। भविष्य में इन नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।