Prabhat Vaibhav,Digital Desk : आजकल कैंसर का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन के ज़रिए किया जाता है। इससे बहुत दर्द और दुष्प्रभाव होते हैं। आजकल जिस टीके की बात हो रही है, वह न केवल कैंसर के इलाज के लिए है, बल्कि उसे होने से रोकने के लिए भी है। यह खबर वाकई आशाजनक है। भारतीय वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के इलाज और रोकथाम के लिए एक नया टीका विकसित किया है। उम्मीद है कि अगर सब कुछ ठीक रहा, तो 2030 तक इस भयानक बीमारी का उन्मूलन हो सकता है। यह हमारे देश और दुनिया भर की महिलाओं के लिए अच्छी खबर है।
यह नया टीका क्या है और यह कैसे काम करेगा?
आजकल कैंसर होने पर सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन के ज़रिए उसका इलाज किया जाता है, जिससे काफ़ी दर्द और साइड इफ़ेक्ट होते हैं। हालाँकि, जिस नए टीके की बात हो रही है, उसका उद्देश्य सिर्फ़ कैंसर का इलाज ही नहीं, बल्कि उसे होने से रोकना भी है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे पोलियो या चेचक जैसी बीमारियों का ख़ात्मा टीकों के ज़रिए किया गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह टीका शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करेगा।
यह शरीर को ऐसे विशेष तत्व बनाने के लिए कहेगा जो कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें नष्ट कर सकें या बढ़ने से रोक सकें। अगर यह सफल रहा, तो कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव आएगा। मरीजों को कम दर्द सहना पड़ेगा और वे बेहतर तरीके से ठीक हो सकेंगे। भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार जैसे शोधकर्ता इस वैक्सीन को बनाने में विशेष भूमिका निभा रहे हैं। उनका यह काम विज्ञान के क्षेत्र में भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।
2030 तक का लक्ष्य: क्या यह संभव है?
2030 तक स्तन कैंसर को पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य भले ही थोड़ा बड़ा लग रहा हो, लेकिन यह वैज्ञानिकों को तेज़ी से काम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इंसानों पर इस वैक्सीन के परीक्षण (क्लीनिकल ट्रायल) सफल रहे और अच्छे नतीजे मिले, तो यह संभव हो सकता है।
किसी भी नई वैक्सीन या दवा को बाज़ार में आने से पहले कई कठोर परीक्षणों से गुज़रना पड़ता है। इसमें कई साल लग सकते हैं। लेकिन, जिस गति से इस क्षेत्र में काम हो रहा है और भारतीय वैज्ञानिकों के प्रयासों को देखते हुए, उम्मीदें बढ़ गई हैं कि यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। हाल ही में, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने भी कहा है कि महिलाओं के लिए एक विशेष कैंसर वैक्सीन अगले पाँच-छह महीनों में उपलब्ध हो जाएगी। हालाँकि, यह सर्वाइकल कैंसर के लिए पहले से मौजूद एचपीवी वैक्सीन से संबंधित हो सकती है। स्तन कैंसर की वैक्सीन अभी शुरुआती परीक्षणों में है।
भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, चाहे वो शहर हों या गाँव। अगर यह टीका सफल होता है, तो इससे न केवल लाखों महिलाओं की जान बचेगी, बल्कि देश पर स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ भी कम होगा। इससे भारत चिकित्सा अनुसंधान और नई खोजों में भी विश्व में अग्रणी बन सकता है।
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