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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के लिए 3540 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इस निवेश के जरिए अयोध्या, गोरखपुर, रायबरेली, फतेहपुर और मीरजापुर जैसे प्रमुख जिलों में 'सुपर मेगा' औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी। औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी के अनुसार, इन परियोजनाओं से न केवल औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।

इन्वेस्टमेंट का पूरा रोडमैप: कहां, कौन और कितना करेगा खर्च?

कैबिनेट ने पांच जिलों में सुपर मेगा श्रेणी की औद्योगिक इकाइयां लगाने के लिए संबंधित कंपनियों को 'लेटर ऑफ कंफर्ट' जारी करने की स्वीकृति दी है। आइए जानते हैं जिलेवार निवेश का पूरा ब्योरा:

जिलाकंपनी का नामनिवेश राशि (करोड़ में)
फतेहपुरडालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड₹776.35 करोड़
मीरजापुरडालमिया भारत विजन लिमिटेड₹772.26 करोड़
गोरखपुरगैलेन्ट इस्पात लिमिटेड₹765.11 करोड़
अयोध्यापक्का लिमिटेड₹676.26 करोड़
रायबरेलीरिलायंस सीमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड₹550.31 करोड़

सब्सिडी और SGST प्रतिपूर्ति का पिटारा खुला

योगी सरकार ने निवेश करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए करीब 566.77 करोड़ रुपये की SGST प्रतिपूर्ति (Reimbursement) और सब्सिडी को भी मंजूरी दी है।

सीतापुर: रेडिको खेतान लिमिटेड को ₹6.88 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी।

गोरखपुर: अंकुर उद्योग और गैलेन्ट इंडस्ट्रीज को कुल ₹62 करोड़ से अधिक की प्रतिपूर्ति।

सोनभद्र: अल्ट्राटेक सीमेंट को ₹9.37 करोड़ की SGST प्रतिपूर्ति।

गौतमबुद्धनगर व उन्नाव: विजन सोर्स एलएलपी को ₹65.07 करोड़ और इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड को ₹19.19 करोड़ की सब्सिडी दी जाएगी।

बीडा (BIDA) में भर्तियों का रास्ता साफ

कैबिनेट ने 'उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयित सेवा नियमावली-2026' में संशोधन को मंजूरी दी है। इस बदलाव के बाद अब बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) को भी अन्य विकास प्राधिकरणों की तरह नियमावली के दायरे में लाया गया है। इससे बीडा में लंबे समय से अटकी कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र के औद्योगिक विकास में तेजी आएगी।

औद्योगिक विकास से बदलेगी यूपी की सूरत

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यूपी अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं, बल्कि एक बड़ा इंडस्ट्रियल हब बन रहा है। इन सुपर मेगा यूनिट्स के आने से स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और छोटे उद्योगों (MSMEs) को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक इन सभी परियोजनाओं पर धरातल पर काम शुरू हो जाए।