Prabhat Vaibhav, Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध अब अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए 'शांति प्रस्ताव' को सिरे से खारिज करते हुए तेहरान पर बेहद तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने ईरान की तुलना एक 'स्टफ्ड पिग' (ठूंसे हुए सूअर) से करते हुए कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी ने ईरान का दम घोंट दिया है और वह अब छटपटा रहा है।
ट्रंप का 'नो कॉम्प्रोमाइज' स्टैंड: परमाणु डील ही एकमात्र रास्ता
एक्सियोस (Axios) को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कर दिया कि जब तक ईरान पूरी तरह से परमाणु हथियारों का मोह नहीं छोड़ता और नई न्यूक्लियर डील पर हस्ताक्षर नहीं करता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी नहीं हटाई जाएगी।
ईरान का ठुकराया हुआ ऑफर:
ईरान ने अमेरिका को एक 'डी-एस्केलेशन' ऑफर दिया था, जिसके मुख्य बिंदु थे:
अमेरिका तत्काल होर्मुज की नाकेबंदी हटाए।
बदले में ईरान क्षेत्र में युद्धविराम लागू करेगा।
परमाणु समझौते (Nuclear Deal) पर बातचीत अगले चरण में की जाएगी।
ट्रंप ने इस सौदे को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि ईरान केवल समय काटना चाहता है। उन्होंने कहा, "वे समझौता करना चाहते हैं क्योंकि उनका दम घुट रहा है, लेकिन मैं तब तक नहीं मानूंगा जब तक उनके परमाणु हथियार बनाने की क्षमता खत्म नहीं हो जाती।"
बमबारी से ज्यादा घातक है नाकेबंदी
ट्रंप ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी किसी बमबारी से भी ज्यादा असरदार साबित हुई है।
तेल संकट: ईरान अपना तेल निर्यात नहीं कर पा रहा है, जिससे उसकी पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
भंडारण की कमी: ईरान के पास अब तेल स्टोर करने की जगह नहीं बची है। उसकी पाइपलाइनें और टैंक फटने की कगार पर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास अब केवल 12 से 22 दिनों का स्टोरेज बचा है।
US सेंट्रल कमांड की 'शॉर्ट स्ट्राइक' योजना
पर्दे के पीछे केवल आर्थिक नाकेबंदी ही नहीं, बल्कि सैन्य कार्रवाई की तैयारी भी चल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर 'संक्षिप्त और प्रभावी' हमलों की एक श्रृंखला (Surgical Strikes) का खाका तैयार किया है।
उद्देश्य: इन छोटे हमलों के जरिए ईरान पर बातचीत की मेज पर आने का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना।
ट्रंप का तेवर: हाल ही में एक राइफल के साथ नजर आए ट्रंप ने कहा था, "मैं बहुत समय तक अच्छा इंसान बनकर रह लिया, अब और नहीं।"
ईरान का पलटवार: 'जल्द मिलेगा ठोस जवाब'
तेहरान भी झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है। ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा सूत्रों और संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़ालिबफ़ ने स्पष्ट किया है कि:
अमेरिका की नाकेबंदी का जल्द ही 'ठोस' जवाब दिया जाएगा।
ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और राष्ट्रीय संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
ईरान ने इसे अमेरिका की 'चालबाजी' करार देते हुए उसे हराने का संकल्प लिया है।




