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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए 24 अप्रैल की शाम एक बड़े सियासी भूकंप की गवाह बनी। पार्टी के 'पोस्टर बॉय' माने जाने वाले राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों ने बगावत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय का ऐतिहासिक ऐलान कर दिया। इस कदम से 'आप' के गलियारों में मची खलबली के बीच अब अरविंद केजरीवाल की टीम ने इन बागियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी इन सातों सांसदों की सदस्यता रद्द कराने के लिए राज्यसभा सभापति के पास याचिका दायर करने जा रही है।

'एंटी-डिफेक्शन लॉ' बनाम 'दो-तिहाई' का गणित

राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि राज्यसभा में 'आप' के कुल 10 सांसदों में से 7 उनके साथ हैं।

चड्ढा का तर्क: संविधान के अनुसार, यदि किसी विधायी दल के दो-तिहाई (2/3) सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) लागू नहीं होता। 10 में से 7 सांसद दो-तिहाई से ज्यादा हैं।

पार्टी की जवाबी कार्रवाई: 'आप' नेतृत्व इन सांसदों को अयोग्य (Disqualify) ठहराने के लिए याचिका तैयार कर रहा है। पार्टी का तर्क है कि इन सांसदों ने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ी है और यह दलबदल की श्रेणी में आता है।

इन 7 चेहरों ने बदला पाला: राघव से लेकर हरभजन तक शामिल

भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों की सूची में पार्टी के कई दिग्गज और रणनीतिकार शामिल हैं:

राघव चड्ढा

संदीप पाठक (पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव)

स्वाति मालीवाल

हरभजन सिंह

अशोक मित्तल

विक्रम साहनी

संजीव अरोड़ा (राजेंद्र गुप्ता के स्थान पर सक्रिय)

राघव चड्ढा ने राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को इस संबंध में औपचारिक पत्र और आवश्यक दस्तावेज सौंप दिए हैं।

"खून से सींचा था, पर पार्टी रास्ते से भटक गई" - राघव चड्ढा

पार्टी छोड़ने के अपने फैसले पर भावुक होते हुए राघव चड्ढा ने कहा, "जिस 'आप' को मैंने 15 सालों तक अपने खून-पसीने से सींचा, वह अब अपने रास्ते से भटक गई है। अब यह देशहित के लिए नहीं, बल्कि निजी फायदों के लिए काम कर रही है।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि वे देश के विकास के लिए भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं।

केजरीवाल के लिए सबसे बड़ा सदमा: संदीप पाठक का जाना

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राघव चड्ढा का जाना एक ग्लैमरस नुकसान हो सकता है, लेकिन संदीप पाठक का जाना केजरीवाल के लिए संगठन की मौत जैसा है। पाठक ही वो शख्स थे जिन्होंने पंजाब और गुजरात में 'आप' का आधार तैयार किया था। उनके भाजपा में जाने से पार्टी की विस्तार योजनाओं को अपूरणीय क्षति हुई है।