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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई है। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान कुवैत के वायु रक्षा बलों (Air Defense Forces) ने तकनीकी चूक के कारण अपने ही सहयोगी देश अमेरिका के 3 F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमानों को दुश्मन का विमान समझकर मार गिराया। युद्ध के मैदान में मची अफरा-तफरी के बीच हुई इस 'फ्रेंडली फायर' की घटना ने सैन्य विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।

आसमान में भ्रम: कैसे हुई यह बड़ी गलती?

अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के अनुसार, यह घटना तब घटी जब अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे थे। उस समय आसमान ईरानी ड्रोन्स, बैलिस्टिक मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से भरा हुआ था।

रडार की विफलता: युद्धक्षेत्र में जब सैकड़ों लक्ष्य एक साथ रडार पर होते हैं, तो 'मित्र' और 'शत्रु' (IFF - Identification Friend or Foe) के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

कुवैत का कबूलनामा: कुवैती रक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि उनके वायु रक्षा यूनिट से निर्णय लेने में गंभीर त्रुटि हुई, जिसके चलते शक्तिशाली अमेरिकी विमानों पर मिसाइलें दाग दी गईं।

चमत्कारिक बचाव: सुरक्षित हैं सभी 6 जांबाज

इस भीषण हादसे के बीच सबसे राहत भरी खबर यह रही कि विमानों में सवार सभी 6 चालक दल के सदस्य (Aircrew) सुरक्षित हैं।

त्वरित निर्णय: जैसे ही मिसाइल ने विमानों को हिट किया, प्रशिक्षित पायलटों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत 'इजेक्ट' (Eject) कर दिया।

रेस्क्यू ऑपरेशन: अमेरिकी बचाव दलों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पैराशूट की मदद से उतरे सभी 6 सैनिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।

मेडिकल अपडेट: प्रारंभिक चिकित्सा जांच के बाद सभी सैनिकों की हालत स्थिर बताई गई है और किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है।

जांच के आदेश और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' पर असर

अमेरिकी केंद्रीय कमान ने इस 'आकस्मिक हमले' की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने जटिल सैन्य अभियान में समन्वय (Coordination) की कमी घातक साबित हो सकती है।

मजबूत संबंध: हालांकि इस घटना से अमेरिका और कुवैत के बीच रक्षा संबंधों में दरार आने की संभावना कम है, लेकिन भविष्य में ऐसी 'ब्लंडर' से बचने के लिए रडार और संचार प्रणालियों को और अधिक सटीक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

रणनीति: 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत अब मित्र देशों के बीच 'डी-कॉन्फ्लिक्शन' (De-confliction) प्रोटोकॉल को और कड़ा किया जाएगा।