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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मुजफ्फरपुर जिले से रिश्ता राजनीति से कहीं ऊपर एक गहरे आत्मीय लगाव का रहा है। 1974 के जेपी आंदोलन से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक की उनकी यात्रा में मुजफ्फरपुर का हर कोना किसी न किसी विकास गाथा या भावुक किस्से का गवाह रहा है। हाल ही में जेडीयू नेताओं ने नीतीश कुमार के उन अनछुए पहलुओं को साझा किया, जो उनके सरल स्वभाव और कार्यकर्ताओं के प्रति उनके सम्मान को दर्शाते हैं।

भादो गांव की नाव यात्रा और कटौंझा पुल की सौगात

जदयू के वरिष्ठ नेता नरेंद्र पटेल एक दिलचस्प वाकया याद करते हैं। औराई में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार को भादो गांव जाना था, लेकिन वहां तक जाने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं थी। मुख्यमंत्री और उनके साथ मौजूद नेता नाव पर सवार होकर निकल पड़े। बीच रास्ते में अचानक झमाझम बारिश शुरू हो गई। छाते के सहारे किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंचे, लेकिन नीतीश कुमार ने इस समस्या को सिर्फ एक चुनौती नहीं, बल्कि विकास की जरूरत के रूप में देखा।

विकास का फैसला: उसी यात्रा के दौरान बागमती नदी पर पुल की कमी को महसूस करते हुए उन्होंने योजना बनाई। आज कटौंझा में बागमती नदी पर पुल बनकर तैयार है, जिसने बरसात के दिनों में आवागमन की समस्या को सदा के लिए खत्म कर दिया है।

हेलीकॉप्टर में कार्यकर्ता संग पिस्ता और बिस्कुट का नाश्ता

बिहार मदरसा बोर्ड के सदस्य प्रो. शब्बीर अहमद पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। जॉर्ज फर्नांडिस के नामांकन के दौरान जब नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर आए, तो उन्होंने हवाई अड्डे पर प्रो. शब्बीर को देखा। मुख्यमंत्री ने बड़े ही आत्मीय भाव से उन्हें बुलाया और साथ में मधुबनी चलने को कहा।

"हेलीकॉप्टर यात्रा के दौरान नीतीश जी ने अपने बैग से पिस्ता और नमकीन बिस्कुट निकाले, खुद भी खाए और मुझे भी खिलाए। उन्होंने न केवल मुझे साथ रखा, बल्कि समस्तीपुर में सभा के बाद यह सुनिश्चित किया कि मैं सुरक्षित मुजफ्फरपुर लौट सकूं।" - प्रो. शब्बीर अहमद

धर्मशाला चौक पर चाय और पुराने साथियों का साथ

भाजपा के वरिष्ठ नेता भोला चौधरी बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नीतीश कुमार की सादगी नहीं बदली। वे विशेष रूप से धर्मशाला चौक स्थित भोला भाई की चाय दुकान पर पहुंचे। वहां बैठकर चाय की चुस्की ली और पुराने कार्यकर्ताओं के साथ घंटों गुफ्तगू की। यह वाकया आज भी मुजफ्फरपुर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहता है।

कार्यकर्ताओं को दिया पूरा मान-सम्मान

पूर्व एमएलसी गणेश भारती, जिनका जुड़ाव मुख्यमंत्री से जेपी आंदोलन के समय से है, बताते हैं कि नीतीश कुमार अपने सहयोगियों को कभी नहीं भूलते। जब वे केंद्र में रेल और कृषि मंत्री थे, तब भी उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को मंत्रालय की समितियों में सदस्य बनाया। वर्ष 2006 में उन्हें एमएलसी की जिम्मेदारी सौंपना भी उनके इसी भरोसे का प्रतीक था।

नीतीश कुमार की ये कहानियां साबित करती हैं कि उनके लिए सत्ता केवल शासन का माध्यम नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं से जुड़ाव और जनसमस्याओं के समाधान का एक जरिया है।