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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार और संगठन को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। सोमवार को कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रियों के साथ हुई विशेष बैठक में मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि कार्यकर्ता सरकार की रीढ़ हैं और उनकी उपेक्षा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रभारी मंत्रियों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर सीधे जमीन पर उतरने और कार्यकर्ताओं की समस्याओं का मौके पर निस्तारण करने का आदेश दिया है।

कार्यकर्ता न हों उपेक्षित: 'लोक भवन' बैठक के बड़े फैसले

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को स्पष्ट किया कि वे केवल अपने प्रभार वाले जिलों तक ही सीमित न रहें, बल्कि अन्य जिलों का भी सघन दौरा करें। उन्होंने कहा कि "कार्यकर्ता किसी भी स्तर पर परेशान या उपेक्षित महसूस नहीं करना चाहिए।" यदि किसी समस्या का समाधान तत्काल संभव न हो, तो संबंधित विभाग के अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के लिए कड़े निर्देश दिए जाएं। जिलों में गठित समन्वय समितियों की बैठकों में मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी अब अनिवार्य होगी।

9 साल की उपलब्धियां और 'ईंधन-खाद' पर नजर

बैठक में सीएम योगी ने मंत्रियों को जनता के बीच जाकर सरकार के पिछले 9 वर्षों की उपलब्धियों का बखान करने को कहा। उन्होंने खाड़ी देशों (ईरान-इजराइल) के मौजूदा हालात के मद्देनजर एलपीजी गैस की आपूर्ति और किसानों के लिए खाद की उपलब्धता पर भी पैनी नजर रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि वैश्विक संकट का असर प्रदेश के आम नागरिक या किसान पर नहीं पड़ना चाहिए।

बजट खर्च पर नाराजगी: 80% व्यय का अल्टीमेटम

विभागीय कामकाज की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने बजट खर्च की धीमी रफ्तार पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपने आवंटित बजट का कम से कम 80 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित करें। साथ ही, अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) की कार्ययोजनाओं को अप्रैल में ही स्वीकृत कराकर समय से काम शुरू करने की डेडलाइन तय कर दी गई है।

वोटर लिस्ट पुनरीक्षण: 10 अप्रैल तक चलेगा विशेष अभियान

आगामी चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) पर विशेष जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 10 अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान में कोई भी पात्र नागरिक छूटने न पाए। खासकर उन 71 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है जहां मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। मंत्रियों को निर्देश दिया गया है कि वे खुद मॉनिटरिंग करें कि 'फॉर्म-6' भरवाकर नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया तेजी से पूरी हो।