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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होने वाला है और इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का विशेष महत्व है। देवभूमि हरिद्वार के प्रसिद्ध विद्वान और ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश शास्त्री के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिन केवल उपवास के नहीं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने के होते हैं। यदि कोई जातक लंबे समय से किसी आसाध्य रोग (Chronic Disease) से पीड़ित है या उसे अपने आसपास नकारात्मक शक्तियों का आभास होता है, तो नवरात्रि में एक विशेष 'शक्तिशाली स्तोत्र' का पाठ उसे चमत्कारी परिणाम दे सकता है। शास्त्रों में वर्णित यह विधि न केवल तन को निरोग करती है, बल्कि मन को भी अभय प्रदान करती है।

दुर्गा सप्तशती का यह पाठ है 'रामबाण' उपाय

पंडित जी बताते हैं कि दुर्गा सप्तशती में वर्णित 'देवी कवच' और 'अर्गला स्तोत्र' का पाठ नवरात्रि में किसी कवच की तरह काम करता है। विशेष रूप से 'रोगानशेषानपहंसि तुष्टा...' मंत्र का संपुट लगाकर किया गया पाठ आसाध्य रोगों को जड़ से मिटाने की क्षमता रखता है। हरिद्वार के हर की पौड़ी पर जुटे श्रद्धालु और साधक सदियों से इस पद्धति का अनुसरण करते आए हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ इन नौ दिनों में माता रानी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाकर इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन से दरिद्रता और बीमारियां कोसों दूर भाग जाती हैं।

बुरी शक्तियों और नजर दोष से मिलेगा परमानेंट छुटकारा

आज के दौर में ईर्ष्या और नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) व्यक्ति की प्रगति में बाधक बनती है। पंडित जी के अनुसार, नवरात्रि की सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर 'अपराजिता स्तोत्र' का पाठ करने से शत्रु बाधा शांत होती है और किसी भी प्रकार की बुरी शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर पाती। यदि आपके बच्चों को बार-बार नजर लगती है या घर में अकारण कलह रहता है, तो मां कालरात्रि के मंत्रों के साथ इस स्तोत्र का श्रवण मात्र भी आपके घर के सुरक्षा चक्र को मजबूत कर देता है। हरिद्वार के विद्वानों का मत है कि यह स्तोत्र साक्षात मां जगदंबा का आशीर्वाद है।

मंत्र सिद्धि के लिए ध्यान रखें ये खास नियम

स्तोत्र पाठ का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसे सही विधि से किया जाए। पंडित रमेश शास्त्री की सलाह है कि नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। पाठ शुरू करने से पहले कलश स्थापना वाले स्थान पर गंगाजल का छिड़काव करें और लाल आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके ही जप करें। यदि आप स्वयं पाठ नहीं कर सकते, तो किसी योग्य ब्राह्मण से इसका श्रवण करना भी समान फलदायी होता है। याद रखें, विश्वास ही वह सेतु है जो भक्त को शक्ति से जोड़ता है। इस नवरात्रि इन दिव्य स्तोत्रों का आश्रय लेकर आप भी अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।