Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबर ने मुजफ्फरपुर जिले की करीब 9 लाख जीविका दीदियों को गहरे सदमे और निराशा में डाल दिया है। जिले के गांवों और कस्बों में आज चर्चा का विषय राजनीति नहीं, बल्कि वह 'भावुक रिश्ता' है जो इन महिलाओं ने अपने 'नीतीश भैया' के साथ पिछले दो दशकों में जोड़ा था।
'फर्श से अर्श' तक का सफर और नीतीश का साथ
मुजफ्फरपुर की जीविका दीदियों का कहना है कि नीतीश कुमार ने उन्हें सिर्फ रोजगार नहीं दिया, बल्कि समाज में सिर उठाकर जीने का 'सम्मान' दिया है। करजा की खुशबू दीदी ने भावुक होते हुए कहा, "नीतीश भैया ने हमें वह पहचान दी जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। आज हम आर्थिक तंगी से बाहर हैं और न केवल अपना परिवार पाल रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।"
शराबबंदी और महिला सशक्तिकरण के वो यादगार पल
नीतीश कुमार और जीविका दीदियों के बीच का रिश्ता हमेशा से खास रहा है। शराबबंदी आंदोलन को सफल बनाने में इन दीदियों ने मुख्यमंत्री की 'ढाल' बनकर काम किया। जिले की महिलाओं को याद है जब कुढ़नी की एक महिला ने नशामुक्ति पर गीत गाया था और नीतीश कुमार ने मंच से उनकी सराहना की थी।
सकरा की चंदू भारती की कहानी: हाल ही में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जब दीदियों के खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे गए, तब सकरा की चंदू भारती ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नीतीश कुमार से बात की थी। उन्होंने 'नीतीश भैया' कहकर अपनी सफलता की कहानी सुनाई थी, जिसे याद कर आज उनकी आंखें नम हैं।
आर्थिक आजादी और सामाजिक बदलाव
जिले की जीविका दीदियों का मानना है कि नीतीश कुमार ने महिलाओं को घर की चारदीवारी से निकालकर उन्हें बैंक और बाजार तक पहुँचाया। आज मुजफ्फरपुर की लाखों महिलाएं बैंक लिंकेज, छोटे उद्योगों और कृषि कार्यों के जरिए सशक्त हो चुकी हैं।
सत्ता परिवर्तन से छाई उदासी
नीतीश कुमार के पद छोड़ने से जीविका दीदियों के बीच एक खालीपन महसूस किया जा रहा है। दीदियों का कहना है कि उन्होंने हमेशा उन्हें अपनी बहन की तरह माना और उनकी समस्याओं पर सीधा भरोसा किया। अब जब वह पद पर नहीं हैं, तो इन महिलाओं को भविष्य की योजनाओं और उस 'भरोसे' को लेकर चिंता सता रही है जो उन्हें अपने भैया से मिलता था।




