Prabhat Vaibhav,Digital Desk : हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है, और जब बात पापमोचनी एकादशी की हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में पापमोचनी एकादशी कल यानी 14 मार्च को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार की एकादशी कुछ खास राशियों के लिए सौभाग्य के द्वार खोलने वाली साबित होगी। ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण इन राशि के जातकों पर भगवान लक्ष्मी-नारायण की असीम कृपा बरसने वाली है, जिससे उनके जीवन में खुशहाली और आर्थिक समृद्धि आएगी।
पापमोचनी एकादशी का शुभ संयोग और महत्व
चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह 'पापों का नाश करने वाली' एकादशी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कल बनने वाले शुभ योगों के कारण इस दिन दान-पुण्य और दीपदान का फल कई गुना बढ़ जाएगा। जो श्रद्धालु कल के दिन व्रत रखेंगे और श्रीहरि के 'चतुर्भुज' रूप की आराधना करेंगे, उनके घर में सुख-संपदा का वास होगा। साथ ही, रुके हुए मांगलिक कार्य भी संपन्न होने के योग बन रहे हैं।
इन राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की के रास्ते
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस एकादशी पर मेष, सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए समय बेहद अनुकूल रहने वाला है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन की खुशखबरी मिल सकती है, वहीं व्यापारियों के लिए धन लाभ के प्रबल संकेत हैं। वृषभ और तुला राशि वालों के पारिवारिक जीवन में चल रहा तनाव दूर होगा और जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगी। इसके अतिरिक्त, यदि आपका पैसा लंबे समय से कहीं फंसा हुआ है, तो भगवान विष्णु की कृपा से वह कल वापस मिल सकता है। करियर के क्षेत्र में भी नए निवेश के अवसर प्राप्त होंगे जो भविष्य में लाभकारी सिद्ध होंगे।
व्रत और पूजा की सरल विधि
कल सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जरूर जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है। व्रत का पारण अगले दिन शुभ मुहूर्त में करने से ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। श्रद्धा भाव से की गई यह पूजा आपके भाग्य में चार चांद लगा सकती है।
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