Prabhat Vaibhav, Digital Desk : ग्रहों के राजा सूर्य और देवताओं के गुरु बृहस्पति की युति को सामान्यतः ज्योतिष में बेहद शुभ माना जाता है। इसे 'राजयोग' के समान फलदायी कहा गया है, लेकिन ग्रहों की चाल हर किसी के लिए एक जैसी नहीं होती। आगामी 11 मई 2026 से बनने जा रही सूर्य-बृहस्पति की यह युति कुछ राशियों के लिए वरदान के बजाय 'अग्निपरीक्षा' लेकर आ रही है। ग्रहों की इस विशेष स्थिति के कारण चार ऐसी राशियां हैं, जिन्हें आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक मोर्चे पर भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।
वृषभ राशि: अहंकार और विवादों से बचना होगा जरूरी
वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है। सूर्य के प्रभाव से आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन और अनचाहा अहंकार बढ़ सकता है। इसका सीधा असर आपके कार्यस्थल (Office) पर पड़ेगा, जहां वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपके मतभेद होने की प्रबल संभावना है। निवेश के मामले में यह समय बिल्कुल अनुकूल नहीं है; किसी भी बड़े वित्तीय जोखिम से बचना ही आपकी समझदारी होगी।
कन्या राशि: मानसिक तनाव और स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है काम
कन्या राशि वालों के लिए यह युति थकान और मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। ऑफिस में काम का बोझ इतना बढ़ सकता है कि इसका नकारात्मक प्रभाव आपकी सेहत पर पड़ने लगेगा। पारिवारिक मोर्चे पर भी चुनौतियां दिख रही हैं, विशेषकर पिता के साथ वैचारिक मतभेद गहरा सकते हैं। यदि पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई मामला चल रहा है, तो उसमें बाधाएं आने के योग हैं, इसलिए धैर्य से काम लें।
मकर राशि: मेहनत ज्यादा, परिणाम कम—धैर्य की होगी परीक्षा
मकर राशि के जातकों के लिए 11 मई के बाद का समय काफी संघर्षपूर्ण रह सकता है। आप मेहनत तो बहुत करेंगे, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक न मिलने से मन में निराशा का भाव जाग सकता है। इसके अलावा, आपकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुँचाने वाली गलतफहमियां भी पैदा हो सकती हैं। अपनी वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखें, अन्यथा विवाद बढ़ सकते हैं।
कुंभ राशि: रिश्तों में बढ़ सकती है कड़वाहट, बड़े फैसलों को टालें
कुंभ राशि के जातकों को 11 मई से रिश्तों के मामले में बहुत संभलकर रहने की जरूरत है। यह समय आपके निजी और व्यावसायिक रिश्तों के लिए संवेदनशील है। करीबी लोगों के साथ छोटी-मोटी गलतफहमियां बड़ी लड़ाई का रूप ले सकती हैं। वित्तीय या व्यापारिक मामलों में कोई भी जल्दबाजी भरा निर्णय भविष्य में घाटे का सौदा साबित हो सकता है। संतुलन बनाए रखना ही एकमात्र समाधान है।




