Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की नई सरकार के सौ दिन पूरे होने तक राजद ने आलोचना से दूरी बनाई थी, लेकिन अब विपक्ष के रूप में उसे अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखानी है। ऐसे में पार्टी ने सरकार को घेरने के लिए विशेष राज्य दर्जा को प्रमुख मुद्दा बनाया है। यह मुद्दा पहले बिहार की राजनीति में व्यापक रूप से चर्चा में रहा था, लेकिन नीति आयोग की स्थापना के साथ इसका स्वरूप समाप्त हो गया था।
तेजस्वी की रणनीति बैठक
शुक्रवार को पार्टी सांसदों के साथ तेजस्वी यादव की लगभग तीन घंटे लंबी बैठक हुई। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसद शामिल हुए। बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा हुई:
संगठनात्मक मजबूती – कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाना
बजट सत्र की रणनीति – संसद में विशेष राज्य दर्जा की मांग जोर देकर उठाना
सरकारी योजनाओं का आकलन – एक करोड़ नौकरी, महिला उद्यमी योजना आदि पर अमल की समीक्षा
बैठक के बाद तय हुआ कि जनता के बीच राजद की छवि आक्रामक और सक्रिय दिखे। इसके अलावा, विधानसभा सत्र के बाद तेजस्वी प्रदेश-व्यापी जनसंपर्क यात्रा पर निकल सकते हैं। इसका उद्देश्य चुनावी हार के बाद हताश कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना है।
रोहिणी आचार्य की टिप्पणी
इसी बीच पार्टी की करीबी रोहिणी आचार्य ने आत्ममंथन और जिम्मेदारी लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समीक्षा का दिखावा करने से बेहतर है कि पार्टी अपने इर्द-गिर्द बैठे ''गिद्धों'' को चिन्हित कर उनका समाधान करे। उन्होंने तेज प्रताप यादव की भाषा में ऐसे लोगों को जयचंद कहा और पार्टी का नया नामकरण राष्ट्रीय जयचंद दल कर दिया।
उनकी टिप्पणी का मुख्य सार:
“समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी खुद आत्म-मंथन करना और जिम्मेदारी लेना है। जनता को हर बात समझ आती है।”
इस प्रकार राजद सरकार की आलोचना और संगठन सुधार दोनों को संतुलित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।




