Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने कोटे के उम्मीदवारों के चयन के लिए मंथन तेज कर दिया है। बिहार भाजपा कोर ग्रुप और प्रदेश चुनाव समिति ने पांच संभावित नामों की शॉर्टलिस्ट तैयार कर केंद्रीय आलाकमान को भेज दी है। इस सूची में सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और संगठन के प्रति निष्ठा को मुख्य आधार बनाया गया है। अब अंतिम मुहर दिल्ली में होने वाली केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में लगेगी।
इन 5 दिग्गजों के नामों की चर्चा सबसे तेज
बिहार भाजपा की ओर से जो नाम दिल्ली भेजे गए हैं, उनमें संगठन के पुराने चेहरों से लेकर अनुभवी रणनीतिकार तक शामिल हैं:
दीपक प्रकाश: वर्तमान में झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं और बिहार भाजपा के सह-प्रभारी के रूप में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
प्रेमरंजन पटेल: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और चुनाव समिति के सचिव हैं। पूर्व विधायक रह चुके पटेल संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर सक्रिय रहे हैं।
सुरेश रूंगटा: बिहार राज्य उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग के अध्यक्ष हैं। उन्हें वैश्य समुदाय और व्यापारिक वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में देखा जा रहा है।
जगन्नाथ ठाकुर: भाजपा के प्रदेश महामंत्री हैं और संगठन के कार्यों में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है।
राधामोहन शर्मा: ये भी प्रदेश महामंत्री के पद पर तैनात हैं और पार्टी के समर्पित चेहरों में गिने जाते हैं।
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष फोकस
सूत्रों के अनुसार, भाजपा इस बार राज्यसभा के जरिए 'मिशन 2027' के लिए सामाजिक समीकरणों को साधना चाहती है। पार्टी की रणनीति एक सामान्य वर्ग, एक पिछड़ा और एक अति पिछड़ा (EBC) चेहरे को प्रतिनिधित्व देने की है। चयन का आधार केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि संसद में प्रभावी ढंग से राज्य के मुद्दों को उठाने की क्षमता भी रखी गई है।
नए चेहरों को मिल सकता है मौका, पुराने भी रेस में
पार्टी के भीतर इस बात की भी प्रबल संभावना है कि कुछ वर्तमान सांसदों को दोहराने के बजाय नए और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को उच्च सदन भेजा जाए। भाजपा नेतृत्व इस संदेश को स्पष्ट करना चाहता है कि संगठन के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को बड़े पदों से नवाजा जाएगा।
एनडीए में समन्वय की कोशिश
चूंकि बिहार में एनडीए (BJP-JDU-LJP) की सरकार है, इसलिए भाजपा अपने सहयोगियों के साथ भी तालमेल बिठाकर चल रही है। 23 मार्च को होने वाले नामांकन और आगामी मतदान को देखते हुए पार्टी की कोशिश है कि उम्मीदवारों के चयन से गठबंधन में एकजुटता का संदेश जाए और विपक्ष को घेरा जा सके।




