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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब सरकार ने नशे की समस्या को शिक्षण संस्थानों से रोकने के लिए एक नया प्रोग्राम शुरू कर दिया है, जिसका नाम ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ रखा गया है। इस पहल का लक्ष्य है स्कूलों और शिक्षकों के साथ मिलकर बच्चों को नशों के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखना और उन्हें सही जानकारी देना ताकि वे भविष्य में नशे से दूर रहें।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के अनुसार, यह प्रोग्राम सीनियर सेकेंडरी स्तर (कक्षा 11-12) के छात्रों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसके तहत पाठ्यक्रम में नशों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक प्रभावों को समझाने वाली जानकारी शामिल होगी, जिससे बच्चे पहले ही जागरूक हों और नशे के खतरों को पहचान सकें। 

सरकार ने यह भी घोषणा की है कि स्कूलों में रोज़ाना ध्यान (Meditation) सत्र शुरू किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य बच्चों में मानसिक अनुशासन, आत्म-नियंत्रण और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है। इससे बच्चों में मानसिक मजबूती आएगी और वे नकारात्मक प्रभावों का सामना बेहतर तरीके से कर सकेंगे। 

इस कार्यक्रम के तहत प्रधानाध्यापक और शिक्षकों का Capacity Building Training भी चल रहा है, जिसमें उन्हें बच्चों में चेतना बढ़ाने और नशे की चेतावनी संकेतों को पहचानने के तरीकों पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। मंत्री बैंस ने कहा है कि शिक्षा और रोकथाम मिलकर नशा समस्या के खिलाफ सबसे ठोस सुरक्षा कवच बनेंगे, और इससे बच्चों को नशों की ओर आकर्षित होने से पहले ही बचाया जा सकेगा। 

सरकार का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे शिक्षा और सामाजिक मूल्यों के ज़रिए रोकथाम-केंद्रित बनाना चाहिए ताकि युवा स्वस्थ, सकारात्मक और सुरक्षित जीवन चुन सकें।