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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के संबंध में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वे पूज्य शंकराचार्य के चरणों में नमन करते हैं और उनसे स्नान करने का अनुरोध करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा करने वालों की जांच की जाएगी। उन्होंने भगवान शंकराचार्य से धरना समाप्त करने और संगम में स्नान करने का भी अनुरोध किया।

शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने क्या कहा?
पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने भी इस विवाद पर एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि यह एक भयंकर युद्ध को न्योता देने जैसा है। यह तब तक जारी रहेगा जब तक हमारा खून खौल न उठे।

कथाकार धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि दोनों पक्षों को आपस में सुलह कर लेनी चाहिए, विवाद का समाधान करना चाहिए और सनातन का उपहास नहीं करना चाहिए। उन्हें आपस में सुलह करके मध्य मार्ग खोजना चाहिए। ऐसा कोई कार्य नहीं किया जाना चाहिए जिससे सनातन का उपहास हो। सनातन का उपहास करने में कोई लाभ नहीं है।

कंप्यूटर बाबा ने क्या कहा?
कंप्यूटर बाबा ने वसंत पंचमी के अवसर पर पंच अग्नि तपस्या की। वैष्णव संप्रदाय में इसे सबसे कठिन तपस्या माना जाता है, क्योंकि साधक अग्नि के बीच में बैठता है और उसके सिर पर जलता हुआ पात्र रखा जाता है। इस विवाद के संबंध में उन्होंने कहा कि यह तपस्या शंकराचार्य को सम्मान देने के लिए की गई थी। उन्होंने आगे बताया कि 10-11 मार्च को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण संत सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस पवित्र सम्मेलन में चारों पूज्य शंकराचार्यों, विश्व के सभी गुरुओं, अखाड़ों के प्रमुखों, महामंडलेश्वरों, महंतों और देश भर के संतों को समान सम्मान के साथ आमंत्रित किया जाएगा।

संतों के इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देना, गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और सनातन धर्म की रक्षा के लिए दृढ़ आध्यात्मिक प्रतिज्ञा लेना है। उन्होंने कहा कि जब तक गौमाता सुरक्षित नहीं होंगी, राष्ट्र की आत्मा भी सुरक्षित नहीं रह सकती।

बाबा रामदेव का उत्तर:
योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि हम शंकराचार्य जी को भगवान शंकर का स्वरूप मानते हैं, इसलिए हम शंकराचार्य जी से किसी प्रकार के विवाद की अपेक्षा नहीं करते। वे संत हैं, तो वे विवाद क्यों करते हैं? कम से कम वे किसी धार्मिक स्थल पर तो विवाद कर सकते हैं, तीर्थ स्थल पर क्यों? यहाँ स्नान करने पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए, न ही पालकी पर। अहंकारी संत कैसा? अहंकार का त्याग करने वाला ही संत बनता है।

बाबा रामदेव ने आगे कहा कि कोई देश का इस्लामीकरण करना चाहता है, कोई इसे ईसाई बनाना चाहता है, कोई ग़ज़वा-ए-हिंद बनाना चाहता है, इसलिए सनातन के बाहर कई दुश्मन हैं, इसलिए कम से कम हमें अपने भीतर तो नहीं लड़ना चाहिए।