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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव के तहत श्रवण कुमार को बिहार विधानसभा में जदयू (JDU) विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके नाम पर मुहर लगाई, जिसके बाद विधानसभा सचिवालय द्वारा इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

नीतीश कुमार के 'संकटमोचक' को मिली कमान

श्रवण कुमार की नियुक्ति को नीतीश कुमार के एक भरोसेमंद साथी पर दांव के रूप में देखा जा रहा है। 20 अप्रैल को हुई जदयू विधायक दल की बैठक में विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को अपना नेता चुनने के लिए अधिकृत किया था। कई नामों पर चर्चा के बाद, नीतीश ने अपने सबसे विश्वसनीय और नालंदा के दिग्गज नेता श्रवण कुमार को चुना।

क्यों मिली श्रवण कुमार को यह बड़ी जिम्मेदारी?

अटूट राजनीतिक रिकॉर्ड: श्रवण कुमार नालंदा विधानसभा क्षेत्र से साल 1995 से लगातार 9 बार विधायक चुने गए हैं। पिछले 31 वर्षों से इस सीट पर उनका वर्चस्व कायम है।

अनुभव का भंडार: वह बिहार सरकार में ग्रामीण विकास, परिवहन और समाज कल्याण जैसे भारी-भरकम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संसदीय प्रक्रियाओं पर उनकी पकड़ पार्टी के लिए विधानसभा में बड़ी ताकत बनेगी।

संगठनात्मक संतुलन: पार्टी ने हाल ही में विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया है। श्रवण कुमार (कुर्मी समाज) को विधायक दल का नेता बनाकर पार्टी ने जातीय और संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश की है।

बढ़ता कद: सुरक्षा में भी हुआ इजाफा

श्रवण कुमार के बढ़ते राजनीतिक रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीन दिन पहले ही बिहार सरकार ने उनकी सुरक्षा बढ़ाकर Y+ श्रेणी की कर दी थी। उन्हें अब एस्कॉर्ट व्यवस्था के साथ सुरक्षा प्रदान की गई है।

अगली चुनौती: 24 अप्रैल का विश्वास मत

विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद श्रवण कुमार की पहली बड़ी परीक्षा 24 अप्रैल को होगी। इस दिन सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में अपना विश्वास मत (Trust Vote) पेश करना है। जदयू के मुख्य सचेतक रहे श्रवण कुमार अब नेता के तौर पर सदन में पार्टी के विधायकों का नेतृत्व करेंगे।