Prabhat Vaibhav, Digital Desk : आज के इस डिजिटल दौर में सुबह उठते ही सबसे पहले स्मार्टफोन चेक करना और रात को सोने से पहले इंस्टाग्राम रील्स स्क्रॉल करना एक आम लत बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह 'डिजिटल एडिक्शन' आपको मानसिक रूप से बीमार कर रहा है? एक ताजा शोध ने यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया की वर्चुअल दुनिया से थोड़ी दूरी और फिजिकल एक्टिविटी से थोड़ी नजदीकी आपको तनावमुक्त और खुशहाल बना सकती है। आइए जानते हैं कि कैसे अपनी दिनचर्या में एक मामूली सा फेरबदल कर आप मानसिक सुकून पा सकते हैं।
शोध में खुलासा: 30 मिनट का फॉर्मूला करेगा कमाल
जर्मनी के एक मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र में डॉ. जूलिया ब्रायलोव्स्काया के नेतृत्व में हुई एक स्टडी ने दुनिया को खुश रहने का सरल मंत्र दिया है। शोध के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी डेली रूटीन से सोशल मीडिया के केवल 30 मिनट कम कर दे और उस समय को शारीरिक व्यायाम (Exercise) में लगाए, तो उसके मानसिक स्वास्थ्य में चमत्कारी सुधार देखने को मिलता है। यह छोटा सा बदलाव न केवल मूड को बेहतर बनाता है, बल्कि इसके सकारात्मक प्रभाव महीनों तक बने रहते हैं।
चार समूहों पर किया गया परीक्षण, चौंकाने वाले थे नतीजे
इस महत्वपूर्ण अध्ययन में लगभग 642 लोगों को शामिल किया गया था। इन लोगों को अलग-अलग समूहों में बांटकर उनकी आदतों पर गौर किया गया। शोध के अंत में यह पाया गया कि जिन लोगों ने सोशल मीडिया का समय घटाया और एक्सरसाइज के लिए वक्त निकाला, वे अन्य लोगों की तुलना में अधिक खुश, संतुष्ट और ऊर्जावान महसूस कर रहे थे। विशेषज्ञों ने पाया कि इन लोगों में अवसाद (Depression) और चिंता (Anxiety) के लक्षण काफी कम हो गए थे।
सोशल मीडिया और मानसिक थकान का गहरा रिश्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर दूसरों की 'परफेक्ट' लाइफ देखना और लगातार आने वाले नोटिफिकेशंस व्यक्ति में असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। घंटों स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहने से न केवल आंखों पर दबाव पड़ता है, बल्कि यह मानसिक थकान और चिड़चिड़ेपन का कारण भी बनता है। वहीं दूसरी ओर, जब हम टहलते हैं, दौड़ते हैं या योग करते हैं, तो शरीर में 'फील गुड' हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो तनाव को तुरंत कम करने में मदद करते हैं।
लंबे समय तक बना रहता है इस बदलाव का असर
इस रिसर्च की सबसे खास बात यह रही कि इसके फायदे केवल कुछ दिनों के लिए नहीं थे। छह महीने बाद जब फिर से प्रतिभागियों का टेस्ट किया गया, तो पाया गया कि जिन्होंने सोशल मीडिया कम करके व्यायाम को अपनाया था, वे अभी भी मानसिक रूप से काफी मजबूत और खुश थे। यानी डिजिटल डिटॉक्स और फिजिकल एक्टिविटी का कॉम्बो आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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