Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देशभर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर विरोध शुरू हो गया है। कई लोग इसे सवर्ण समाज के खिलाफ दमनकारी कदम मान रहे हैं। इस बीच, सैकड़ों की संख्या में लोग डीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंप चुके हैं, जबकि पूर्व पार्षद जगदीश पचौरी और उनके साथियों ने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिल को वापस लेने की मांग की है।
मुख्य विरोध बिंदु
जगदीश पचौरी ने कहा कि इस बिल में कई त्रुटियां हैं, जो आने वाले समय में समस्याएं पैदा करेंगी। उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव बढ़ाने वाला करार देते हुए कहा कि यह नियम सिर्फ सवर्ण समाज के उत्पीड़न और हताशा का प्रतीक है। भाजपा नेता पचौरी के साथ क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने भी आंदोलन की चेतावनी दी है।
राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने का निर्णय
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ब्रज प्रदेश की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक ताजगंज स्थित होटल ग्रांड अंपायर में संपन्न हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 27 जनवरी को सुबह 11 बजे ब्रज प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा जाएगा।
सवर्ण समाज की एकता पर जोर
वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री रघुवंशी सिंह राजू ने कहा कि सामाजिक एकता कमजोर होने के कारण ही कुछ शक्तियां सवर्ण समाज के खिलाफ ऐसे नियम बना रही हैं। उन्होंने अपील की कि सवर्ण समाज की सभी जातियां एक मंच पर आकर यूजीसी के इस बिल का विरोध करें, ताकि सरकार इसे वापस लेने के लिए मजबूर हो।
बरेली में प्रशासनिक भूचाल
गणतंत्र दिवस के मौके पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने यूजीसी कानून के विरोध में इस्तीफा दिया, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। महापौर डा. उमेश गौतम ने इस्तीफे पर पुनर्विचार की अपील की, लेकिन शासन ने मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया और मामले की जांच उच्च अधिकारियों को सौंपी गई।




