Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाने का निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने शुक्रवार को बिहार विधान परिषद में घोषणा की कि अब राज्य के सभी विश्वविद्यालयों की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह डिजिटल होगी। इस बदलाव का सबसे बड़ा उद्देश्य सत्रों में होने वाली देरी को खत्म करना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। अब बिहार के छात्रों को न केवल आधुनिक परीक्षा प्रणाली मिलेगी, बल्कि परिणाम (Result) की तारीख भी पहले से पता होगी।
डिजिटल होगी कॉपियों की जांच, खत्म होगी धांधली
शिक्षा मंत्री के अनुसार, अब केवल परीक्षा ही नहीं बल्कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन (Digital Evaluation) भी कंप्यूटर के माध्यम से किया जाएगा।
पारदर्शिता: डिजिटल मूल्यांकन से मानवीय त्रुटि की गुंजाइश खत्म होगी और अंकों में हेराफेरी पर रोक लगेगी।
तेजी: कॉपियों की ऑनलाइन स्कैनिंग और जांच से परिणामों की घोषणा में लगने वाला समय 50% तक कम हो जाएगा।
ट्रैकिंग: छात्र अपनी कॉपियों की स्थिति और जांच की प्रक्रिया को ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे।
रिजल्ट की तारीख होगी फिक्स, एकेडमिक कैलेंडर होगा अपडेट
बिहार की यूनिवर्सिटीज में 'सेशन लेट' होना एक पुरानी समस्या रही है। इसे दूर करने के लिए सरकार ने दो बड़े प्रस्ताव रखे हैं:
परिणाम की पूर्व-निर्धारित तिथि: परीक्षा फॉर्म भरने के साथ ही छात्रों को बता दिया जाएगा कि उनका रिजल्ट किस तारीख को आएगा।
समयबद्ध सत्र: शैक्षणिक कैलेंडर को पूरी तरह नियमित किया जाएगा ताकि स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्रियां समय पर मिल सकें।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद शुरू होगा अमल
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव कुलपतियों की बैठक में रखा जा चुका है। चूंकि राज्यपाल (Chancellor) विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होते हैं, इसलिए इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए उनकी अंतिम स्वीकृति अनिवार्य है। राजभवन से हरी झंडी मिलते ही इसे चरणबद्ध तरीके से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में लागू कर दिया जाएगा।
छात्रों के लिए क्यों जरूरी है यह बदलाव?
वर्तमान व्यवस्था में मैन्युअल मूल्यांकन और डाक के जरिए कॉपियों के इधर-उधर होने से रिजल्ट में महीनों की देरी होती है। कई बार छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं या उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करने से चूक जाते हैं। डिजिटल प्रणाली लागू होने से बिहार के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर अन्य राज्यों के छात्रों के साथ कदम से कदम मिला सकेंगे।




