Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति विवाद और फर्जी रजिस्ट्रेशन को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने गुरुवार को आधार आधारित ऑथेंटिकेशन सिस्टम को सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लागू करने की मंजूरी दी। यह सिस्टम एक फरवरी 2026 से लागू होगा।
आधार से प्रमाणीकरण और इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्री
नए नियमों के तहत अब से आधार धारकों की पहचान ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और ई-हस्ताक्षर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्थापित की जाएगी। डीड रजिस्ट्रेशन के दौरान निष्पादक, पार्टियां और गवाह इस सिस्टम के जरिए अपनी पहचान सत्यापित करेंगे। स्टाम्प और रजिस्ट्री राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि इससे रजिस्ट्रेशन में धोखाधड़ी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पुराने दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन
कैबिनेट ने 2002 से 2017 तक पंजीकृत संपत्ति दस्तावेजों के डिजिटलाइजेशन और इंडेक्सिंग के काम के लिए छह माह की अतिरिक्त अवधि दी है। परियोजना की कुल लागत 123.62 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। अब तक स्कैनिंग का 98.37% और इंडेक्सिंग का 99.11% कार्य पूरा हो चुका है। एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर और प्रयागराज में कार्य अभी अधूरा है, जिसे अगले छह माह में पूरा किया जाएगा।
फायदे और सुरक्षा
इस डिजिटल प्रणाली से पुराने दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। जमीन-जायदाद से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और संपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी होगी।




