Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव इन दिनों केरल विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवारों के लिए धुआंधार प्रचार कर रहे हैं। हालांकि, इस प्रचार के दौरान उनका एक अंग्रेजी भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे लेकर भाजपा ने उन पर चौतरफा हमला बोल दिया है। भाजपा नेताओं ने तेजस्वी की अंग्रेजी में व्याकरण संबंधी (Grammatical) गलतियों को पकड़ते हुए उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
"I have come from" पर मचा बवाल
केरल में एलडीएफ (LDF) गठबंधन के समर्थन में जनसभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने अंग्रेजी में अपनी बात रखने की कोशिश की। भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस वीडियो को साझा करते हुए तंज कसा कि तेजस्वी की अंग्रेजी आज भी 'नौवीं फेल' स्तर की ही है।
व्याकरण पर सवाल: नीरज कुमार ने कहा कि तेजस्वी ने भाषण में 'I have come from' जैसे गलत वाक्यों का प्रयोग किया, जबकि सही वाक्य 'I am from Bihar' होना चाहिए था।
बिहार की छवि: भाजपा का आरोप है कि तेजस्वी ने सार्वजनिक मंच से बिहार को "Poorest State" (सबसे गरीब राज्य) कहकर राज्य की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल करने की कोशिश की है।
केरल चुनाव में RJD की दावेदारी
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) केरल में वामपंथी गठबंधन (LDF) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। पार्टी को केरल में 3 सीटें मिली हैं, जहां तेजस्वी खुद कमान संभाले हुए हैं:
वडाकारा (कोझिकोड): एम.के. भास्करन उम्मीदवार हैं।
कुत्थुपरंबा (कन्नूर): पी.के. प्रवीण मैदान में हैं।
कालपेट्टा (वायनाड): पी.के. अनिल चुनाव लड़ रहे हैं।
इसी चुनावी रैलियों के दौरान दिए गए भाषणों ने अब बिहार की राजनीति में भी उबाल ला दिया है।
भाषा बनाम राजनीति: छिड़ी बहस
इस विवाद ने सोशल मीडिया पर दो फाड़ कर दिए हैं:
विपक्ष का तर्क: भाजपा इसे तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता और ज्ञान की कमी से जोड़कर देख रही है। उनका कहना है कि जो नेता सही से भाषा नहीं बोल सकता, वह विकास का खाका कैसे खींचेगा।
राजद का बचाव: तेजस्वी के समर्थकों का कहना है कि मुद्दा भाषा नहीं बल्कि नीतियां होनी चाहिए। केरल जैसे राज्य में जहां अंग्रेजी और मलयालम का प्रभाव है, वहां लोगों से जुड़ने की कोशिश की सराहना होनी चाहिए न कि व्याकरण की कमियां निकाली जानी चाहिए।
फिलहाल, 'ग्रामर' की यह जंग बिहार से लेकर केरल तक चुनावी चर्चा का मुख्य केंद्र बनी हुई है। अब देखना यह है कि क्या यह विवाद केरल के मतदाताओं के मूड को प्रभावित करता है या केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहता है।




