Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर बिहार के मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। पछुआ हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से बिहार के आसमान पर बादलों का डेरा शुरू हो गया है। मौसम विभाग (IMD) ने 9 और 10 अप्रैल 2026 को राज्य के अधिकांश हिस्सों, विशेषकर उत्तर बिहार में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि (Hailstorm) का अलर्ट जारी किया है। चिलचिलाती धूप के बीच अचानक आए इस बदलाव ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अगले 48 घंटों का पूर्वानुमान (9-10 अप्रैल)
मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार, उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर एक चक्रवातीय परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है, जिसके कारण बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त हवाएं बिहार में प्रवेश कर रही हैं।
तेज हवाएं: बारिश के दौरान हवा की रफ्तार 22 से 25 किमी प्रति घंटा तक जा सकती है।
ओलावृष्टि: मुजफ्फरपुर, दरभंगा, चंपारण और सारण जैसे जिलों में कहीं-कहीं भारी ओलावृष्टि की संभावना है।
तापमान: अगले 4-5 दिनों में अधिकतम तापमान 32°C से 35°C और न्यूनतम तापमान 18°C से 20°C के बीच रहने का अनुमान है।
किसानों के लिए 'रेड अलर्ट': फसल बचाने की चुनौती
गेहूं की कटाई के इस चरम सीजन में बेमौसम बारिश और ओले 'विनाशकारी' साबित हो सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने निम्नलिखित सामयिक सुझाव जारी किए हैं:
सावधानीपूर्वक कटाई: जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल पक चुकी है, वहां किसान मौसम साफ होते ही तेजी से कटाई करें और अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखें।
बुआई की सलाह: यह समय गरमा मूंग और उरद की बुआई के लिए उपयुक्त है, किसान इसे प्राथमिकता दें।
कीट प्रबंधन: प्याज की खेती करने वाले किसान 'थ्रिप्स' कीट पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि नमी वाला मौसम इनके फैलने के लिए अनुकूल होता है।
शहर का मिजाज: गर्मी और सन्नाटा
इससे पहले मंगलवार को उत्तर बिहार के जिलों में चिलचिलाती धूप का कहर जारी था। मुजफ्फरपुर में अधिकतम तापमान 34.5°C दर्ज किया गया, जबकि पश्चिम चंपारण में पारा 33°C के पार रहा। दोपहर के वक्त सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोग डिहाइड्रेशन से बचने के लिए गन्ने के रस, सत्तू और बेल के शरबत का सहारा लेते नजर आए।
[Image showing a field of wheat under a dark, stormy sky with lightning, symbolizing the threat to crops]
सावधानी: खराब मौसम के दौरान बिजली कड़कने पर ऊंचे पेड़ों या खंभों के नीचे शरण न लें। सुरक्षित पक्के मकानों के अंदर रहें।




