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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी शनिवार (11 अप्रैल 2026) को लखीमपुर खीरी जिले में एक ऐसे ऐतिहासिक कार्य का शुभारंभ करने जा रहे हैं, जिसकी प्रतीक्षा पिछले छह दशकों से की जा रही थी। भारत-नेपाल सीमा पर बसे थारू जनजाति के लोगों और बांग्लादेशी विस्थापित परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक (Property Rights) मिलने जा रहा है। दशकों से अपनी ही जमीन पर 'अतिथि' बनकर रह रहे इन परिवारों के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीं होगा।

किन्हें मिलेगा लाभ? 24 गांव और हजारों परिवार

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री के इस दौरे से मुख्य रूप से दो बड़े समूहों को लाभ होगा:

थारू जनजाति: भारत-नेपाल सीमा पर बसे 24 गांवों के लगभग 4,000 से अधिक परिवारों को उनकी भूमि का वैध अधिकार पत्र सौंपा जाएगा।

बांग्लादेशी विस्थापित: 1964 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से विस्थापित होकर मियांपुर में बसाए गए लगभग 300 परिवारों को मालिकाना हक मिलेगा। इसमें से 156 परिवारों को उनकी कृषि भूमि के पट्टे भी दिए जाएंगे।

मालिकाना हक मिलने से क्या बदलेगा?

अब तक इन परिवारों के पास जमीन तो थी, लेकिन कागजों में नाम न होने के कारण वे कई सरकारी लाभों से वंचित थे। अब वे:

बैंक लोन: अपनी जमीन पर खेती या व्यवसाय के लिए बैंक से ऋण ले सकेंगे।

पक्का मकान: प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य माध्यमों से अपने पक्के घर बना सकेंगे।

खरीद-बिक्री: कानूनी रूप से जमीन के स्वामी होने के नाते वे भूमि का अन्य उपयोग या हस्तांतरण कर पाएंगे।

तैयारियों के बीच 'जल संकट' पर नाराजगी

एक तरफ जहां मालिकाना हक मिलने की खुशी है, वहीं मियांपुर गांव की महिलाओं ने जमीनी समस्याओं को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है।

सूखी टोटियां: ग्रामीणों का आरोप है कि 'जल जीवन मिशन' के तहत पाइपलाइन तो बिछी है, लेकिन पिछले 6 महीनों से घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है।

प्रशासन को चेतावनी: ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी मुख्यमंत्री के स्वागत और सजावट में तो व्यस्त हैं, लेकिन उनकी बुनियादी दुश्वारियों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्राम प्रधान मिथुन ढाली ने हालांकि जल्द समाधान का भरोसा दिया है।

प्रशासनिक अलर्ट: एडीएम और डीएम संभाल रहे कमान

एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर पूरा प्रशासनिक अमला हाई अलर्ट पर है। कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा से लेकर लाभार्थियों की सूची के मिलान तक का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। मुख्यमंत्री के हाथों हक मिलने की उम्मीद में गांवों में जश्न का माहौल है और लोग बाबा बर्फानी की तरह अपने मुख्यमंत्री का स्वागत करने को तैयार हैं।