Prabhat Vaibhav,Digital Desk : गया नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति (Empowered Standing Committee) के सात सदस्यों के लिए 17 अप्रैल को होने वाले चुनाव ने जिले की राजनीति में सरगर्मी तेज कर दी है। चुनाव से ठीक पहले जोड़-तोड़ और पार्षदों को अपने पक्ष में करने की कवायद 'बाड़ेबंदी' तक पहुँच गई है। खबर है कि एक प्रभावशाली उम्मीदवार ने जीत सुनिश्चित करने के लिए 17 वार्ड पार्षदों को उनके परिवारों के साथ बिहार से बाहर सैर-सपाटे पर भेज दिया है।
17 पार्षद 'लापता', 30 का आंकड़ा जुटाना बड़ी चुनौती
गया नगर निगम में कुल 53 वार्ड पार्षद हैं। सशक्त स्थायी समिति का सदस्य बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 30 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में, यदि एक उम्मीदवार ने 17 पार्षदों को अपने पाले में कर भी लिया है, तो भी उसे बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुँचने के लिए 13 और पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में भी बैठकों का दौर जारी है, जहाँ 'जातिगत समीकरणों' के आधार पर पार्षदों को लामबंद किया जा रहा है।
मेयर और डिप्टी मेयर के मतदान पर कानूनी पेंच
इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल मेयर और डिप्टी मेयर के मताधिकार को लेकर बना हुआ है। चूंकि अब बिहार में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाता है, इसलिए वे 'वार्ड पार्षद' की श्रेणी में नहीं आते।
विभागीय संशय: निर्वाचन अधिकारी सह डीडीसी शैलेश कुमार दास और नगर आयुक्त अभिषेक पलसिया के अनुसार, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मेयर और डिप्टी मेयर को इस चुनाव में वोट डालने का अधिकार है या नहीं। मतदाता सूची में फिलहाल केवल निर्वाचित वार्ड पार्षदों के नाम शामिल किए गए हैं।
चुनाव की प्रशासनिक तैयारियाँ पूरी
17 अप्रैल को डीआरडीए (DRDA) भवन में होने वाले इस चुनाव के लिए प्रशासन ने मुस्तैदी बढ़ा दी है।
पारदर्शिता: चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति कर दी गई है और मतपेटियों की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।
रणनीति: 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार के गठन के बाद स्थानीय समीकरण और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है, क्योंकि कई पार्षद सत्ता परिवर्तन के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
गया नगर निगम की इस 'सत्ता की चाबी' माने जाने वाली समिति के चुनाव में अब सबकी निगाहें 17 अप्रैल को होने वाले मतदान पर टिकी हैं।




