Prabhat Vaibhav, Digital Desk : बक्सर जिले की आबोहवा को शुद्ध करने और गंगा के तटीय क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। जिलाधिकारी (DM) साहिला की अध्यक्षता में आयोजित जिला पर्यावरण और आर्द्रभूमि समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस मिशन का मुख्य आकर्षण गंगा किनारे 50 एकड़ में बनने वाला रिवर बायोडायवर्सिटी पार्क होगा।
एनजीटी के निर्देश पर रिवर बायोडायवर्सिटी पार्क की तैयारी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए, गंगा नदी के 5 किलोमीटर के दायरे में कम से कम 50 एकड़ भूमि पर एक जैव विविधता पार्क विकसित किया जाएगा।
उद्देश्य: नदी के पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) का संरक्षण करना और स्थानीय वनस्पतियों व जीव-जंतुओं को सुरक्षित आवास प्रदान करना।
कार्य प्रगति: इसके लिए एक उपसमिति का गठन किया गया है, जिसे जल्द से जल्द भूमि चिह्नित कर प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया गया है।
प्रदूषण और अवैध खनन पर 'सीधी कार्रवाई' जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी:
अवैध खनन: जिला खनन पदाधिकारी को नियमित छापेमारी करने और अवैध बालू या पत्थर खनन में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पुराने वाहन: जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को सड़कों पर दौड़ रहे उन पुराने वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने को कहा गया है जो वायु प्रदूषण का मुख्य कारण हैं।
GRAP का क्रियान्वयन: पटना हाईकोर्ट के आदेशानुसार, वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
शहर को मिलेगा 'सिटी फॉरेस्ट' और धूल से मुक्ति बक्सर के शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए डीएम ने सिटी फॉरेस्ट विकसित करने की योजना पर चर्चा की।
कचरा प्रबंधन: नगर निकायों को निर्देश दिया गया है कि कचरा केवल निर्धारित लैंडफिल साइट पर ही फेंका जाए और वहां पौधरोपण कर हरियाली बढ़ाई जाए।
धूल नियंत्रण: एनएच और मुख्य सड़कों पर धूल कम करने के लिए नियमित सफाई और पानी के छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं।
ध्वनि प्रदूषण: लाउडस्पीकर और निर्माण कार्यों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए भी विभाग को मुस्तैद किया गया है।
कोलिया खाप आर्द्रभूमि (Wetland) का संरक्षण बैठक में सिमरी प्रखंड स्थित कोलिया खाप आर्द्रभूमि के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसके प्रबंधन के लिए आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियां जल्द प्राप्त करने का आदेश दिया गया है ताकि जल स्रोतों और प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवास को बचाया जा सके।
प्रमुख बिंदु (Highlights): * क्षेत्र: गंगा के किनारे 5 किलोमीटर का दायरा।
क्षेत्रफल: 50 एकड़ का रिवर बायोडायवर्सिटी पार्क।
प्रशासनिक कदम: जीआरएपी (GRAP) का प्रभावी क्रियान्वयन।
फोकस: वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण पर लगाम।




