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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की राजनीति में एक लंबे और प्रभावशाली अध्याय का समापन हो गया है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही करीब दो दशकों के उस शासनकाल पर विराम लग गया है, जिसने बिहार को 'लालटेन युग' से निकालकर 'एलईडी युग' तक पहुँचाया। अब बिहार की कमान सम्राट चौधरी की ओर बढ़ती दिख रही है, जिनसे जनता को विकास की नई रफ्तार और व्यवस्था परिवर्तन की भारी उम्मीदें हैं।

नीतीश कार्यकाल: बुनियादी ढांचे के कायाकल्प का दौर

नीतीश कुमार के दो दशक के शासन को उत्तर बिहार, विशेषकर दरभंगा के केवटी प्रखंड में बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए याद किया जाएगा। दो दशक पहले जहाँ केवटी के अधिकांश गांवों में पक्की सड़कें और बिजली एक सपना हुआ करती थीं, वहां आज प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के माध्यम से गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा जुड़ाव हो गया है।

बिजली क्रांति: हर घर बिजली योजना के तहत खिरमा में विद्युत पावर सब-स्टेशन का निर्माण और गांवों तक बिजली की निरंतर आपूर्ति नीतीश सरकार की बड़ी उपलब्धि रही।

प्रशासनिक मजबूती: पंचायत सरकार भवनों के निर्माण ने स्थानीय स्तर पर सरकारी सुविधाओं को जनता के द्वार तक पहुँचाया।

शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की नई पहचान

नीतीश युग में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव देखे गए। केवटी में 'कनीज फातमा अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय' और 'राजकीय अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय विद्यालय' जैसे संस्थानों का निर्माण इसका प्रमाण है। साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति योजनाओं ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को स्कूल की दहलीज तक पहुँचाया, जिससे नामांकन दर में ऐतिहासिक सुधार हुआ।

स्वास्थ्य सेवाएँ: सुधार हुआ, लेकिन चुनौतियाँ बरकरार

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (केवटी-रनवे) और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों का जीर्णोद्धार किया गया। हालांकि, बुनियादी ढांचे के बावजूद चिकित्सकों की कमी और संसाधनों का अभाव आज भी एक बड़ी चुनौती के रूप में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली आगामी व्यवस्था के सामने खड़ा है।

सम्राट चौधरी से 'बदलाव' की अपेक्षाएँ

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। जनता की अपेक्षा है कि:

रोजगार सृजन: बुनियादी ढांचे के बाद अब युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हों।

सिंचाई और कृषि: केवटी जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में अधूरी सिंचाई योजनाओं को जल्द पूरा किया जाए।

कानून-व्यवस्था: विकास की गति को बनाए रखने के लिए कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए।

नीतीश कुमार का दौर स्थिरता और बुनियादी सुधारों के लिए जाना जाएगा, लेकिन अब बिहार की जनता सम्राट चौधरी के रूप में एक ऐसे युवा नेतृत्व की ओर देख रही है, जो विकास की इस यात्रा को नई ऊंचाइयों पर ले जा सके।