Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही राज्य की राजनीति के एक स्वर्णिम और प्रभावशाली अध्याय का समापन हो गया है। करीब 20 वर्षों तक बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार के कार्यकाल को दरभंगा का कुशेश्वरस्थान क्षेत्र हमेशा एक 'क्रांतिकारी बदलाव' के दौर के रूप में याद रखेगा। कभी 'बाढ़ की राजधानी' के रूप में अभिशप्त यह इलाका आज पक्की सड़कों और आधुनिक बुनियादी ढांचे के दम पर नई पहचान बना चुका है।
बाढ़ की विभीषिका से मुक्ति: फुहिया स्लूइस गेट ने बदली किस्मत
कुशेश्वरस्थान के लिए बाढ़ एक वार्षिक त्रासदी थी, जहां साल के छह महीने लोग पानी में घिरे रहते थे। 31 अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद यहां की भयावह स्थिति का मुआयना किया था। जनता की मांग पर उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए करेह नदी के उत्तरी तटबंध को फुहिया से जोड़ते हुए 12 फाटकों वाला अत्याधुनिक स्लूइस गेट बनवाया। इस ऐतिहासिक कदम से क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ मुक्त हो गया है और अब पूर्वी प्रखंड की केवल चार पंचायतें ही प्रभावित रह गई हैं।
चचरी पुलों के दौर से हाई-वे के सफर तक
दो दशक पहले कुशेश्वरस्थान के गांवों तक पहुंचना एक चुनौती थी। नदी-नालों को पार करने के लिए लोग नाव या बांस के चचरी पुलों के भरोसे थे। नीतीश कुमार के शासनकाल में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना और पुल निर्माण निगम के माध्यम से लगभग हर गांव को पक्की सड़कों से जोड़ा गया। आज चचरी पुलों की जगह कंक्रीट के मजबूत पुलों ने ले ली है, जिससे प्रखंड और जिला मुख्यालय तक का सफर सुगम हो गया है।
अंधेरे से उजाले की ओर: हर घर पहुंची बिजली
बिजली के क्षेत्र में कुशेश्वरस्थान की प्रगति किसी चमत्कार से कम नहीं है। पहले जहां केवल 8-10 गांवों तक ही सीमित और नाममात्र की बिजली पहुंचती थी, वहीं आज हर घर तक बिजली का कनेक्शन पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, 'कृषि फीडर' के माध्यम से अब किसानों के खेतों तक बिजली पहुंचाने का काम भी अंतिम चरण में है, जिससे खेती की लागत कम हुई है।
पर्यटन और आस्था: 'उत्तर बिहार का देवघर' बनेगा पर्यटन हब
धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी कुशेश्वरस्थान ने लंबी छलांग लगाई है। 'उत्तर बिहार के देवघर' के नाम से मशहूर कुशेश्वरस्थान शिव मंदिर को 'शिव सर्किट' से जोड़ा गया है। इसके पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुले हैं। इसके अलावा पंचायत सरकार भवनों और आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण ने सरकारी सुविधाओं को सीधे ग्रामीण स्तर तक पहुंचाया है।
जदयू कार्यकर्ताओं में मायूसी, भविष्य पर सबकी नजर
नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबर सुनते ही स्थानीय जदयू कार्यकर्ताओं और समर्थकों में मायूसी का माहौल है। लोगों का कहना है कि महिला सशक्तिकरण, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के विकास में नीतीश कुमार का कोई सानी नहीं रहा। अब जब नीतीश युग का पटाक्षेप हो चुका है, तो कुशेश्वरस्थान सहित पूरे बिहार की जनता यह देखने को उत्सुक है कि आने वाला नया नेतृत्व विकास की इस विरासत को किस ऊंचाई तक ले जाता है।




